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दिल्ली में दफन है खिलजी, अचानक क्यों उमड़ने लगी है कब्र और मदरसे में लोगों की भीड़..

नई दिल्ली/चंडीगढ़। संजय लीला भंसाली की फिल्म की 'पद्मावत' सफलतापूर्व सिनेमाघरों में चल रही है। फिल्म का नाम 'पद्मावत' जरुर है लेकिन फिल्म देख कर बाहर निकलने वाले लोगों में खिलजी के बारे में जानने की गजब जिज्ञासा दिख रही है, लोग जानना चाह रहे हैं कि जो खिलजी इतना क्रूर था उसकी मौत कैसे हुई और उसकी कब्र कहां है?

कॉन्सेप्ट इमेज।


संजय लीला भंसाली की फिल्म भले ही 'पद्मावत' को लेकर विवादों में रही लेकिन रिलीज़ के साथ लोगों में अलाउद्दीन खिलजी को लेकर ज़बरदस्त क्रेज़ है। इसका श्रेय कहीं न कहीं रणवीर सिंह के दमदार अभिनय को दिया जा सकता है।

खिलजी के बारे में जानना चाह रहे हैं लोग!
फिल्म रिलीज होने के साथ ही दिल्ली में कुतुब मीनार के पास बने खिलजी के मकबरे में अचानक ही चहल-पहल बढ़ गई है, जो लोग पहले सिर्फ कुतुब मीनार देख लौट आते थे अब वो जाते ही पहले खिलजी के बारे में पूछते नज़र आ रहे हैं, इसे वक्त का तकाजा ही कहेंगे क्योंकि जिसके बार में कल तक लोगों को पढ़ने में कोई दिसचस्पी नहीं थी। उसका ऐसा खूंखार चरित्र-चित्रण कर देने से दर्शक इतने प्रभावित हो गए कि वो खिलजी के मकबरे और कब्र के पास जाकर उसके अतीत को महसूस करना चाहते हैं।

फिल्म का असर !
जिस अलाउद्दीन के कब्र पर कल तक इक्के दुक्के लोग पहुंचते थे आज वहां सेल्फी खिचाने वालों की भीड़ दिख रही है। क्या कहें इसे, शायद लोग इतिहास पढ़ कर उस समय की कल्पना नहीं कर पा रहे होंगे या फिर भागदौड़ भरी जिदंगी में पढ़ने का वक्त किसके पास है, ऐसे में खिलजी की कब्र के पास उमड़ी भीड़ को हम भंसाली के काल्पिनक करेक्टर अलाउद्दीन खिलजी का ही असर कहेंगे कि लोग अचानक खिलजी की कब्र और मदरसे तक पहुंचने लगे हैं।

क्या लिखा है मदरसे के बाहर?
मदरसे के बाहर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से एक पत्थर लगा है जिस पर कुछ यूं लिखा है, "ये चतुर्भुजीय अहाता जो ऊंची दीवारों से घिरा है, यह मूल रूप से एक मदरसा था जिसका प्रवेश द्वार पश्चिम में है। इसका निर्माण पारंपरिक तालीम देने के लिए अलाउद्दीन खिलजी (ईसवी 1296 -1316 ईसवी) द्वारा करवाया गया था। अहाते के दक्षिणी हिस्से के बीच में शायद खिलजी का मकबरा है। मदरसे के साथ ही मकबरे के चलन का यह हिंदुस्तान में पहला नमूना है। यह शायद सलजुकियान रवायत से मुत्तासिर है।"

कहां है खिलजी की कब्र?

अलाउद्दीन खिलजी का मदरसा और मकबरा तो कुतुब मीनार के पास ही मौजूद है, लेकिन अगर आप खिलजी की कब्र को देखना चाहते हैं तो आपको कुतुब मीनार से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी और तय कर महरौली पंहुचना पड़ेगा। क्योंकि महरौली में मौजूद कुतुब कॉंपलेक्स के पीछे ही खिलजी की कब्र है।

खूंखार खिलजी की मौत कैसे हुई?
कहा जाता है कि जब खिलजी कमजोर पड़ने लगा तो उसके कमांडर मलिक काफूर ने ही उसकी सत्ता हथियाने के लालच में उसे मार डाला। उसने खिलजी को नजरबंद कर धीमा जहर देना शुरू कर दिया। उस जहर से उसकी मौत हो गई और उसकी हत्या के बाद उसने उसके बेटों को भी अंधा कर दिया। काफूर ने उसकी सभी बेगमों को अपना गुलाम बना लिया था।


खिलजी के बेटे ने काफूर को उतारा था मौत के घाट
लेकिन मलिक काफूर का ये पागलपन ज्यादा दिन नहीं चल पाया और खिलजी के बेटे मुबारक ने कुछ सैनिकों के साथ मिल कर उसकी गर्दन काट दी। अलाउद्दीन खिलजी को भले ही महत्वाकांक्षी शासक, खूनी, लूटेरा, क्रूर हत्यारा कहा जाता हो लेकिन इस बात पर भी किसी को शक नहीं होना चाहिए, कि वह दिल्ली के कद्दावर शासकों में से एक था। जिसने अपनी ताकत और दूरदर्शी सोच से 30 साल तक दिल्ली की गद्दी पर राज किया।



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