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क्यों शादीशुदा महिलाओं के लिये जरूरी है सिंदूर लगाना

सिंदूर किसी भी सुहागन स्त्री के 16 सिंगार में से एक होता हैं। जिसका उसके जीवन में बहुत ही महत्व हैं। सिंदूर सुहागन के सुहाग का प्रतीक माना जाता हैं। इसलिए विवाहित स्त्री के लिए सिंदूर अमूल्य एवं परम आवश्यक होता हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर हिंदू महिलाएं सिंदूर क्यों लगाती हैं ?


विवाहित स्त्रियां हमेशा अपनी मांग में सिंदूर मस्तिष्क के बीच में भरती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार महिलाओं के मस्तिष्क में इस स्थान पर एक महत्वपूर्ण ग्रंथि स्थित होती हैं। जिसे ब्रहमरंध्र कहा जाता हैं। ब्रहमरंध्र ग्रंथि मस्तिष्क की एक बहुत ही संवेदनशील ग्रंथि होती हैं। यह ग्रंथि महिला के मस्तिष्क के अग्र भाग से शुरू होती हैं तथा मस्तिष्क के बीच में ख़त्म होती हैं। मस्तिष्क के इस स्थान में ही विवाहित स्त्रियां सिंदूर लगाती हैं।


ब्रहमरंध्र ग्रंथि के शुरू से लेकर अंत तक इसलिए सिंदूर लगाया जाता हैं। क्योंकि सिंदूर में एक पारा नामक धातु पाया जाता हैं। जो ब्रहमरंध्र ग्रंथि के लिए एक बेहद ही प्रभावशाली धातु सिद्ध होता हैं। ऐसा माना जाता हैं कि पारा नामक धातु महिलाओं के मस्तिष्क के तनाव को कम करता हैं तथा इस धातु के कारण ही महिलाओं का मस्तिष्क हमेशा चैतन्य अवस्था में रहता हैं।

सिंदूर में मरकरी होता है जो अकेली ऐसी धातु है जो लिक्विड रूप में पाई जाती है। सिंदूर लगाने से शीतलता मिलती है और दिमाग तनावमुक्त रहता है। सिंदूर शादी के बाद लगाया जाता है क्योंकि ये रक्त संचार के साथ ही यौन क्षमताओं को भी बढ़ाने का भी काम करता है।


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