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पेरेंट्स इस बात का रखेंगे ध्यान तो बच्चे जरूर बनेंगे सक्सेसफुल

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा आगे चलकर कुछ अच्छा बनें कुछ अच्छा करे और नाम रोशन करे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें आपकी पेरेंटिंग एक अहम रोल अदा करती है। आपके बच्चे में वो एक क्वालिटी उसे खास बनाती है जिसको पहचान कर आप एक अच्छे पेरेंट बन जाते हैं जो आपके नन्हे-मुन्ने को बुलंदियों तक पहुंचाने के लिये जरूरी है।


जब बच्चा माता-पिता की जिंदगी में आता है तभी से वे लोग न जानें क्या-क्या सपने संजोने लगते हैं। हम अपने बच्चे को ये बनाएंगे वो बनाएंगे और न जाने क्या-क्या। जैसे-जैसे बच्चे बढ़ने लगते हैं मां-बाप की उम्मीदें और बढ़ने लगती हैं। आपके बच्चे का भविष्य निर्माण के लिये आपका सहयोग बहुत जरूरी होता है। हम यहां आपको कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपको बच्चे के अंदर छिपे हुनर को पहचानने में आसानी होगी।


अगर आप अपने बच्चे के अंदर छिपे हुनर को पहचान जाएंगे तो एक अच्छे पेरेंट होने के साथ ही एक अच्छी गाइडेंस आप बच्चे को दे पाएंगे। इसके लिये आपको इन चीजों का ध्यान रखना होगा, अपने बच्चे पर पैनी नजर रखनी होगी कि वे किस दिशा में जा रहे हैं।

1. बच्चों को सिखाना होगा धैर्य
ये ऐसा सबक है जो हर माता पिता को अपने बच्चे को सिखाना चाहिये। क्योंकि अगर बच्चों के अंदर धैर्य नहीं होगा तो वे अपने लक्ष्य को हांसिल करने का हौसला बरकरार नहीं रख पायेंगे।

2. उनका गोल डिसाइड करने में करें मदद
यह भी एक पेरेंट होने के नाते बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है जो आपके बच्चे को आगे चलकर काम आती है। जैसे आप अपने बच्चे की पसंद-ना पसंद का ख्याल रखती हैं वैसे ही कोशिश करें कि इस बात का ध्यान रखें कि उसका कौन सी चीजों में मन लग रहा है और किसमें नहीं। ये चीजें आपको उन्हें समझने में आगे चलकर मददगार साबित होती हैं।

3. उन्हें सिखायें हार्ड वर्क करना
धैर्य के साथ जरूरी है कि बच्चा अपने लक्ष्य की ओर केंद्रित हो। इस लक्ष्य को बरकरार रखने में आप उसकी मदद कर सकते हैं। बच्चे को बार-बार इस बात का एहसास दिलाते रहें कि वह अकेला नहीं है। जिससे बच्चा लंबे समय तक अपने लक्ष्य को पाने के लिये मेहनत कर सकेगा।

4. सेट करें गोल
आपके बच्चे के लिये यह भी जरूरी है कि वह कभी फेलियर से न डरे। तो इसके लिये जरूरी है कि आप उसके निर्धारित लक्ष्य से उसे डराने की बजाये सिखायें कि कैसे इस डर से जीता जा सकता है। बच्चे को खुद छोड़ दें कि वह अपना काम खुद से करे। इससे उसके अंदर आत्मनिर्भरता के साथ अनुशासन आयेगा जो उसे फेलियर से लड़ना सिखायेगा।


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