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बच्चों में साइबरबुलिंग से खुदकुशी का विचार आने का दोगुना खतरा

लंदन। एक शोध में सामने आया है कि जिन बच्चों को सोशल मीडिया पर धमकाया, डराया या तंग किया जाता है (साइबर बुलिंग की जाती है) उन बच्चों और युवाओं के दिमाग में खुद को नुकसान पहुंचाने और खुदकुशी करने का विचार आने का दोगुना खतरा होता है।


शोध में यह भी बताया गया है कि खुदकुशी या खुद को नुकसान पहुंचाने का विचार सिर्फ पीड़ितों में ही आने का खतरा नहीं होता है बल्कि लोगों को तंग करने वाले व्यक्ति के दिमाग में भी ऐसे विचार आ सकते हैं।


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सोशल मीडिया के मार्फत किसी को सताने के लिए धमकाने, डराने या बदगुमान संदेश भेजना इस दायरे में आता है। इसे ही ‘साइबरबुलिंग’ कहते हैं।

ब्रिटेन के स्वांसी विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और बर्मिघम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 21 साल से ज्यादा अवधि के दौरान 150,000 बच्चों और युवाओं पर इसकी पड़ताल की है। यह पड़ताल ‘जनरल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च’ में प्रकाशित हुई है। इसमें सोशल मीडिया पर लोगों को तंग करने वालों और इसके शिकार दोनों पर अहम प्रभाव को रेखांकित किया गया है।

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शोधकर्ताओं ने दबंगई से निपटने के लिए प्रभावी नीति बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि स्कूल की बुलिंग रोधी नीति में साइबरबुलिंग की रोकथाम को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं को दोस्तों का आनलाइन सपोर्ट उपलब्ध कराने के साथ ही इसमें किसी अन्य के हस्तक्षेप की तकनीक सिखाने, मोबाइल फोन कंपनियों से संपर्क करने के साथ ही लोगों को ब्लॉक करने की तकनीक के बारे में शिक्षित करने या लोगों की पहचान करने के तरीके सिखाने पर विचार करना चाहिए।

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