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बदल रहा है भारत, 18 वर्षों बाद WEF में होंगे भारतीय प्रधानमंत्री

वाशिंगटन। अमेरिका के एक पूर्व शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी वैश्विक मंच पर बदलती भारतीय महत्वाकांक्षा का सूचक है। प्रधानमंत्री मोदी 22 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दो दिवसीय दौरे पर जाएंगे जहां वह डब्ल्यूईएफ के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे।

राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी (फाइल फोटो)


दरअसल, पिछले 18 साल में यह पहला मौका है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री प्रतिष्ठित डब्ल्यूईएफ की बैठक में शामिल होंगे। इससे पहले पी वी नरसिम्हा राव और एच डी देवगौड़ा ने दावोस के इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री मोदी 22 जनवरी को डब्ल्यूईएफ के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे।


आगामी सम्मेलन से पहले इसी सप्ताह व्हाइट हाउस ने भी घोषणा की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी विश्व के आर्थिक नेताओं की इस बैठक में शामिल होंगे। सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड की एक बैठक की भी संभावना जताई जा रही है।

मंच पर 18 साल में पहले अमेरिकी राष्ट्रपति

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने बताया कि पिछले 18 साल में पहली बार होगा कि एक अमेरिकी राष्ट्रपति वैश्विक आर्थिक नेताओं की वार्षिक सभा में भाग लेंगे।

भारत, रूस और चीन में कोई बुराई नहीं
आज गुरूवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी रूस के साथ संबंध सुधारने की अपनी इच्छा को लेकर हो रही आलोचना पर प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने कहा कि भारत, रूस और चीन जैसे देशों के साथ काम करने में कोई बुराई नहीं है और यह अच्छी बात है।

बताई अमेरिका की नीति, रूस की भी चर्चा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरूवार को नॉर्वे के प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग के साथ भी मुलाकात की। व्हाइट हाउस में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के संबोधित करेत हुए उन्होंने कहा कि उनकी नजर सेना को मजबूत बनाने, बड़ी मात्रा में तेल और गैस तथा ऊर्जा का भंडार करने पर है, लेकिन रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को यह पसंद नहीं आ सकता।

भारत पर लेखिका ने जाहिर की अपनी राय
विदेश संबंध परिषद् की सीनियर फेलो और बाजार में जल्द ही उपलब्ध होने वाली पुस्तक ‘अवर टाइम हैज कम: हाउ इंडिया इज मेकिंग इट्स प्लेस’ की लेखिका एलिसा आयरेस ने भी इस सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री और भारत की भागीदारी पर अपनी राय जाहिर की है।

बदल रही है भारतीय महत्वाकांक्षा
‘एशिया ब्रीफिंग: इंडिया 2018’ विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए लेखिका एलिसा आयरेस ने कहा कि उनके अनुसार यह वैश्विक मंच पर भारतीय महत्वाकांक्षाओं को झलकाता है। पिछले ‘विश्व आर्थिक मंचों’ में भारत की ओर से कैबिनेट मंत्रियों की अध्यक्षता में बड़े प्रतिनिधिमंडलों ने भले ही प्रतिनिधित्व किया हो, लेकिन यह उससे थोड़ा अलग रहने वाला है।

चीन हो सकता है मोदी के भागीदारी का कारण
लेखिका एलिसा आयरेस ने कहा कि उनका अनुमान है कि पिछले साल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उपस्थिति एक वजह हो सकती है, जिससे भारत ने भी यह फैसला किया कि इस साल सरकार के प्रमुख को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आप देख सकते हैं कि भारत ज्यादा सक्रिय तरीके से कदम बढा रहा है।

क्या है विश्व आर्थिक फोरम
स्विट्जरलैंड में स्थित एक नन प्रोफिट संस्था विश्व आर्थिक फोरम (वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम) की स्थापना वर्ष 1971 में हुई थी। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। स्विस अधिकारियों द्वारा इसे एक प्राइवेट-पब्लिक सहयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।

पढ़ें: SC के फैसले के बाद शिवसेना का तंज- राष्ट्रवाद पर 'भक्त' स्पष्ट करें रूख

विश्व आर्थिक फोरम का उद्देश्य विश्व के व्यवसाय, राजनीति, शैक्षिक और अन्य क्षेत्रों में अग्रणी लोगों को एक साथ लाकर वैश्विक, क्षेत्रीय और औद्योगिक दिशा तय करना है। इस संस्था की सदस्यता अनेक स्तर पर होती है और ये स्तर उनकी संस्था के कार्यकलापों में सहभागिता पर निर्भर करती है। सदस्यता के लिए वह कंपनी चुने जाते हैं जो विश्व भर में अपने उद्योग में अग्रणी होते हैं अथवा किसी भौगोलिक क्षेत्र के प्रगति में अहम भूमिका निभा रहे होते हैं।


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