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कर्नाटक चुनावः जानें क्यों, राहुल ने युवाओं पर नहीं जताया भरोसा

नई दिल्ली। क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को युवाओं पर भरोसा नहीं रह गया है? क्या वे सिर्फ भाषणों में ही युवाओं को सपने दिखाते हैं? मौका मिलने के बावजूद राहुल गांधी ने युवाओं के बजाए, बुजुर्गों पर भरोसा क्यों जताया? बात कर्नाटक विधानसभा चुनाव की है। पार्टी ने पहली सूची में जिन 218 उम्मीदवारों को मौका दिया है, इनमें से 90 फीसदी पुराने चेहरे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी को अपना वादा भी याद नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ कर्नाटक के सीएम सिद्धरमैया (फाइल फोटो)।


दरअसल, अध्यक्ष बनने के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा था कि पार्टी में युवाओं और नए चेहरों को ज्यादा से ज्यादा अवसर दिया जाएगा। लेकिन हकीकत में यह बयान महज एक 'जुमला' जैसा लगता है। कर्नाटक में राहुल के सामने बड़ा मौका था, पर उन्होंने चुनावी जीत को ही प्राथमिकता दी है। उन्हें लगता है कि जो उम्मीदवार चुनाव जीता सकते हैं, उसे ही टिकट दो।


संभवतः यही कारण रहा कि पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताया गया। 218 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम का ऐलान हो चुका है। इनमें 90 फीसदी वही नाम हैं, जो सिद्धरमैया की सरकार में रह चुके हैं।

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कांग्रेस पार्टी का कहना है कि लक्ष्य जीत है, इसलिए कैंडिडेट का चयन ट्राइड एंड टेस्टेड आधार पर किया गया है।

कांग्रेस नेता टॉम वडकन का कहना है कि कर्नाटक में इस बार कांग्रेस की जीत निश्चित है, जनता हमें जानती है, सिद्धरमैया सरकार ने जो वादे किए थे, वो पूरे किए हैं।

(कांग्रेस नेता टॉम वडकन)

वडकन ने कहा कि जनता के दरबार में सिद्धिरामया खरे उतरे हैं, इसलिए जनता अपने विश्वास के साथ एक स्थिर सरकार के लिए वोट करेगी और कर्नाटक में एक बार फिर पंजे का परचम लहराएगा।

वंशवाद कर्नाटक इलेक्शन में भी नजर आ रहा है। सिद्धरमैया के बेटे डॉक्टर यतीन्द्र वरुणा से चुनावी मैदान में है।
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार से कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज रणदीप सिंह सुरजेवाला भी अगले कुछ दिनों तक कर्नाटक में ही रहेंगे।

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कांग्रेस की पिछली चुनावी नीतियों को देखते हुए जानकारों के मुताबिक कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर संशय बरकरार है। वैसे, पार्टी को अपने ट्रंप कार्ड 'लिंगायत मुद्दा' पर पूरा भरोसा है।

कर्नाटक में 12 मई को चुनाव होने हैं।

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