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पूर्व अधिकारियों का मोदी पर निशाना, बोले- आजाद भारत का सबसे अंधकार समय

नई दिल्ली। सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे खुले पत्र में कहा है कि यह आजाद भारत का सबसे अंधकारमय समय है। पत्र में ‘भयावह परिस्थितियों’ के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया गया है।

पीएम मोदी और पत्र लिखने वालों में शामिल अधिकारी (डिजाइन फोटो)।


ऐसा माना जा रहा है कि यह पत्र उन्नाव और कठुआ बलात्कार मामलों की पृष्ठभूमि में लिखा गया है। पत्र लिखने वाले 49 पूर्व अधिकारियों के समूह ने कहा है कि गलतियां स्वीकार करने और प्रायश्चित करने के बजाए प्रधानमंत्री मौन रहे।

नजरंदाज नहीं कर सकते थे

अधिकारियों ने कहा कि पीएम मोदी ने अपनी चुप्पी तब जाकर तोड़ी जब भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनता का गुस्सा उस स्तर पर पहुंच गया जिसे वह और अधिक नजरंदाज नहीं कर सकते थे।

क्या कहा था पीएम मोदी ने

बता दें कि शुक्रवार को, पीएम मोदी ने उन्नाव और कठुआ में नाबालिगों से बलात्कार की घटनाओं को देश के लिए ‘शर्मिंदा’ करने वाला बताया था। उन्होंने आश्वस्त किया था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और बेटियों को पूरा न्याय मिलेगा।
सियासत की कमजोर प्रतिक्रिया
पीएम मोदी को लिखे गए पत्र में लिखा गया, ‘आजाद भारत का यह सर्वाधिक अंधकारमय वक्त है। हमारी सरकार, हमारे सियासी दलों के नेताओं ने अपर्याप्त और कमजोर प्रतिक्रिया दी।’

देश अनैतिकता के गर्त में

जम्मू - कश्मीर के कठुआ में आठ वर्षीय बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या की घटना के संदर्भ में पत्र में लिखा गया कि जो ‘पाशविकता और बर्बरता’ बरती गई है वह दिखाती है कि देश अनैतिकता के किस गर्त में जा गिरा है।

किसने लिखा पत्र

जानकारी के मुताबिक इन 49 अधिकारियों में पुणे पुलिस के पूर्व आयुक्त मीरान बोरावनकर, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सिरकर, मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त जुलियो रिबेरो, आरटीआई कार्यकर्ता अरूणा रॉय और पूर्व सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह शामिल हैं।

प्रदेश सरकारों का जिक्र
पत्र में यह भी जिक्र किया गया है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की बहुमत की सरकार है जबकि जम्मू - कश्मीर में उसका पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार है।

तो इसलिए जिम्मेदार हैं पीएम मोदी

अधिकारियों ने पत्र में लिखा, ‘ दोनों ही मामलों में प्रधानमंत्री आपकी ही पार्टी सत्ता में है। पार्टी के भीतर आपका कद और जिस तरह का केंद्रीकृत नियंत्रण आप और आपकी पार्टी के अध्यक्ष रखते हैं, ऐसे में वर्तमान के भयावह हालात के लिए किसी और से ज्यादा जिम्मेदार आप हैं।’

पीड़ितों से माफी मांगें पीएम मोदी

इसमें प्रधानमंत्री से कहा गया कि वह उन्नाव और कठुआ में पीड़ितों के परिवारों से मिलें और उनसे ‘हम सबकी ओर से माफी मांगें।’


और क्या लिखा है पत्र में
पत्र में कहा गया, ‘हमें उम्मीद थी कि संविधान को बरकरार रखने की जिस व्यक्ति ने शपथ ली, सरकार- जिसके आप नेता हैं और पार्टी जिससे आप आते हैं वह लगातार आ रही गिरावट को देखकर जागेंगे। पत्र में इस बात का जिक्र है कि जन प्रतिनिधि आगे आकर इस गिरावट और सड़ांध को दूर करेंगे और सभी को भरोसा दिलाएंगे, ऐसी उम्मीद भी थी।

संवेदनशील तबकों की खास उम्मीद

पत्र में आगे लिखा गया है 'इस संबंध में समाज के अल्पसंख्यकों और संवेदनशील तबकों को खास उम्मीद थी कि उन्हें अपने जीवन और आजादी को लेकर डरने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन यह उम्मीद खत्म हो गई।’

संघ पर भी बोला हमला

कठुआ मामले के संदर्भ में इस पत्र में कहा गया है कि यह ‘बहुसंख्यक की आक्रामकता की संस्कृति है जिसे संघ परिवार बढ़ावा दे रहा है।’ जिसके कारण वे सांप्रदायिक तत्व मजबूत हुए हैं जिनका विकृत एजेंडा है।’

पढ़ें:
कठुआ-उन्नाव दुष्कर्म : PM मोदी ने तोड़ी चुप्पी, कहा-अपराधी नहीं बचेगा

एक इंसान के तौर पर हम विफल

पत्र में कहा गया कि हिंदू होने के नाम पर एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान से बर्बरता से पेश आना बताता है कि एक समाज के रूप में और एक इंसान के तौर पर हम विफल हो गए हैं।

राष्ट्र के तौर पर भी विफल

इसमें कहा गया, ‘हम उस राष्ट्र के तौर पर विफल हो गए हैं जिसे अपनी नैतिकता, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व है, जिसने एक समाज के रूप में सहिष्णुता, क्षमा और भाईचारे के सभ्य समाज के मूल्यों को संजो कर रखा है।


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