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रिसॉर्ट में 'कैद' विधायक, जानें किसने शुरू की ऐसी पॉलिटिक्स

बेंगलुरु। कर्नाटक में किसकी सरकार बनेगी, पेंच फंसा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। कांग्रेस और जेडीएस ने भी सरकार बनाने का फैसला किया है। ऐसे में जाहिर है, नंबर किसके पक्ष में है, इसे लेकर घमासान जारी है। दोनों ही पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। विधायकों की एक तरीके से 'होर्डिंग' की जा रही है। जब तक सरकार बन नहीं जाती और बहुमत साबित नहीं कर लिया जाता है, तब तक विधायकों को किसी 'होटल या रिसॉर्ट' में रखने का 'खेल' शुरू हो गया है।

डिजाइन फोटो।


खबर है कि कांग्रेस पार्टी ने अपने कुछ नेताओं को इसकी जिम्मेवारी दे दी है। वैसे, औपचारिक तौर पर इसे किसी ने इसे स्वीकार नहीं किया है। जेडीएस के विधायकों को भी उनके साथ रखा जाएगा। बात तो यहां तक सामने आ गई है कि 109 कमरे बुक करा लिए गए हैं। बेंगलुरु स्थिति इग्लेटन होटल में विधायक रुकेंगे। होटल कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार का है।


आपको बता दें कि 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी कई बार ऐसे प्रयास आजमाए जा चुके हैं। एक नजर इन पर डालें।

अगस्त 2017 में कांग्रेस नेता अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा चुनाव लड़ रहे थे। कांग्रेस ने गुजरात के 44 विधायकों को इग्लेटन रिसॉर्ट बेंगलुरु में रखा था। पटेल चुनाव जीत गए।

फरवरी 2017 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद से ओ पन्नीरसेल्वम ने इस्तीफा दे दिया। जयललिता के निधन के बाद वीके शशिकला ने उन पर दबाव बनाया था। विधायकों को चेन्नई के गोल्डेन बे रिसॉर्ट में रखा गया था। ये अलग बात है कि शशिकला को सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाई और जेल भेज दी गईं।

2011 में जब कर्नाटक के सीएम बीएस येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, उन्होंने 60 विधायकों को बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में रखा था। वो चाहते थे कि उनके प्रतिनिधि सदानंद गौडा सीएम बनें। छह महीने बाद फिर से येदियुरप्पा ने ऐसा ही किया, लेकिन तब उनका उद्देश्य गौडा का इस्तीफा लेना था और वह फिर से सीएम बनना चाहते थे।

जून 2002 में महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता विलासराव देशमुख ने अपने विधायकों को मैसूर भेजा। 71 कांग्रेस विधायक उनके साथ थे। उनके साथ एनसीपी विधायक और कुछ निर्दलीय विधायक मैसूर के रिसॉर्ट में गए थे।

1995 में चंद्रबाबू नायडू ने हैदराबाद के वायसरॉय होटल में अपने समर्थक विधायकों को रखा था। एनटी रामा राव गुट से विधायकों को बचाने के लिए उन्होंने ऐसा किया था।

1995 में ही गुजरात में तत्कालीन सीएम केशुभाई पटेल के अमेरिका दौरे पर जाने के बाद शंकर सिंह वाघेला ने असंतुष्ट विधायकों को जुटाना शुरू किया। 121 में से 105 पांच विधायक उनके बुलावे पर आए। इनमें से 47 विधायक उनके साथ चलने के लिए तैयार हो गए। वाघेला बागी विधायकों को लेकर मध्यप्रदेश (खजुराहो) चले गए। तब एमपी में दिग्विजय सिंह की सरकार थी।

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1984 में एनटी रामा राव आंध्र के सीएम रहते अमेरिका गए थे। वह ऑपरेशन के लिए गए थे। इसी बीच गवर्नर ने एन भास्कर राव को मुख्य मंत्री बना दिया। एनटीआर जब लौटे तो उन्होंने अपने सभी विधायकों को दसप्रकाश पैराडाइज होटल में एक महीने तक रखा। तब उनके साथ चंद्रबाबू नायडू भी थे। रामकृष्ण हेगड़े ने भी उनका समर्थन किया था।

1983 में रामकृष्ण हेगड़े ने अपने विधायकों को कांग्रेस से बचाने के लिए ऐसा किया था। माना जाता है कि हेगड़े ही वो पहले नेता थे, जिन्होंने विधायकों को बचाने के लिए रिसॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू की थी।

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