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IIT ने माना- मानवीय गतिविधियों से बढ़े ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन और तापमान

नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने पर्यावरण परिवर्तन पर एक ताजा अध्ययन किया है। अध्ययन के अनुसार पश्चिमी हिमालयी इलाकों विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर और आस-पास के क्षेत्रों में तापमान में तेज वृद्धि हुई है।

कॉन्सेप्ट इमेज।


आईआईटी के ताजा अध्ययन में यह पाया गया है कि पिछले 50 साल के दौरान ग्रीन हाउस गैस (GHG) तापमान में कम से कम 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार है। यह परिस्थिति ग्लोबल वार्मिंग के लिए भी जिम्मेदार है।


परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं हम
अध्ययन के दौरान पाया गया कि पूर्वोत्तर और उत्तर-मध्य भारत एकमात्र ऐसे क्षेत्र हैं जहां तापमान में बढ़ोतरी (वार्मिंग) का कोई खास असर नहीं दिखा। वैज्ञानिकों ने पहली बार माना है कि मानवीय गतिविधियां ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) के उत्सर्जन और भारत में हो रहे जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं।

वार्मिंग 0.5 डिग्री सेल्सियस तक
शोधकर्ताओं ने पाया कि इस साल भारत में ग्रीन हाउस गैस के कारण होने वाली तापमान-बढ़ोतरी (वार्मिंग) बाकी साल की तुलना में तीन गुना अधिक रहा। वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदूषण के ठंडे प्रभाव और जीवाश्म ईंधन के उपयोग के कारण वार्मिंग 0.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रही।

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वर्ष 1956 से 2005 तक का अध्ययन
बता दें कि मंगलवार को प्रकाशित आईआईटी, दिल्ली के वैज्ञानिकों के शोध में वर्ष 1956 से 2005 तक की तापमान-विविधता का अध्ययन किया है। प्रदूषण और भूमि उपयोग में बदलाव के कारण 1.2 डिग्री सेल्सियस की ठंड हुई। इसके परिणामस्वरूप 0.65 डिग्री सेल्सियस नेट वार्मिंग हुई जो 0.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के काफी करीब है।

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