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कश्मीर रिपोर्ट पर भारत भड़का, भाजपा-कांग्रेस आई साथ

जिनेवा। संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर पर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें मानवाधिकार उल्लंघन की बात कही गई है। भारत ने इस रिपोर्ट को प्रेरित बताकर खारिज कर दिया है। यूएन ने अंतरराष्ट्रीय जांच की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट कश्मीर के दोनों हिस्सों के लिए है।

सुनिए क्या कहा राजीव शुक्ला ने।


मानवाधिकार निगरानी संस्था ने पाकिस्तान को शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं के खिलाफ आतंक रोधी कानूनों का दुरूपयोग रोकने और असंतोष की आवाज के दमन को भी बंद करने को कहा।


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तुरंत समाधान की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि मानवाधिकार उल्लंघन की अतीत की और मौजूदा घटनाओं के तुरंत समाधान की जरूरत है। इसमें कहा गया है, ‘‘कश्मीर में राजनीतिक स्थिति के किसी भी समाधान में हिंसा का चक्र रोकने के संबंध में प्रतिबद्धता और पूर्व में तथा मौजूदा मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर जवाबदेही होनी चाहिए।’’

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ लोगों पर नुकसानदेह असर पड़ा है और उन्हें मानवाधिकार से वंचित किया गया या सीमित किया गया।’

भारत ने किया इस रिपोर्ट को खारिज
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘भारत इस रिपोर्ट को खारिज करता है। यह ‘भ्रामक, पक्षपातपूर्ण और प्रेरित है। हम ऐसी रिपोर्ट की मंशा पर सवाल उठाते हैं।’

मंत्रालय ने कहा कि यह रिपोर्ट भारत की सम्प्रमुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करती है। सम्पूर्ण जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान ने भारत के इस राज्य के एक हिस्से पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।

क्या है भारतीय अधिकारियों का कहना
भारतीय अधिकारियों का कहना रहा है कि जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती, क्योंकि जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुयी सरकार है, जबकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मनमाने तरीके से पाकिस्तानी राजनयिक को प्रमुख नियुक्त किया जाता है।

रिपोर्ट में कही गई बातें

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1980 के दशक के अंत से जम्मू कश्मीर राज्य में विभिन्न तरह के हथियारबंद समूह सक्रिय हैं। भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों हिज्बुल मुजाहिद्ददीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है।

इस तरह के प्रत्यक्ष सबूत हैं कि इन समूहों ने आम नागरिकों का अपहरण और उनकी हत्याएं, यौन हिंसा सहित विभिन्न तरह से मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है ।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इन समूहों को किसी भी तरह के समर्थन से पाकिस्तान सरकार के इंकार के दावों के बावजूद विशेषज्ञों का मानना हे कि पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा के पार कश्मीर में उनकी गतिविधियों में सहयोग करती है।’

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विशेषाधिकार कानून को हटाने की मांग
रिपोर्ट में सशस्त्र बल (जम्मू कश्मीर) विशेषाधिकार कानून, 1990 को तुरंत निरस्त करने और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपी सुरक्षा बलों के खिलाफ अदालतों में मुकदमा चलाने के लिए केंद्र सरकार से पूर्व की अनुमति की बाध्यता को भी हटाने की मांग की गयी है।

पहली बार यूएनएचआरसी ने कश्मीर और पीओके में कथित मानवाधिकार उल्लंघन पर कोई रिपोर्ट जारी की है।

कांग्रेस पार्टी ने किया मोदी सरकार का समर्थन
कांग्रेस पार्टी ने भारत सरकार का समर्थन किया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि वह इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज करती है। पार्टी ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर वह सरकार के साथ पूरी तरह से खड़ी है।

कश्मीर में मानवाधिकार के कथित उल्लंघन वाली संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को खारिज करते हुए पार्टी प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'यह रिपोर्ट तथ्यों से परे है। ऐसा लगता है कि रिपोर्ट को कश्मीर की स्थिति के बारे में जाने बिना तैयार कर दिया गया। इस रिपोर्ट की हम निंदा करते हैं। इस पर सरकार का जो रुख है, कांग्रेस उसके साथ है।'



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