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मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने राहुल को दिया जीत का मंत्र

नई दिल्ली। मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि राहुल मुस्लिमों को विशेष वर्ग के तौर पर संबोधित न करें। उनका नाम लेने से अच्छा होगा कि वो गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा की स्थिति पर भाषण को केन्द्रित रखें।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)


राहुल 12 मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मिले। इनमें इतिहासकार इरफान हबीब, लेखिका रक्षंदा जलील, कारोबारी जुनैद रहमान, नदीम जावेद, लेखक फराह नकवी और मुस्लिम बुद्धिजीवी इलियास मलिक शामिल थे। बैठक में कांग्रेस
नेता सलमान खुर्शीद भी मौजूद थे।
बैठक के बाद इरफान हबीब ने बताया कि राहुल को मुस्लिम समुदाय का नाम नहीं लेना चाहिए। बल्कि गरीबी और शिक्षा पर अपनी बात को लोगों के समक्ष रखनी चाहिए। इससे 90 फीसदी लोगों तक उनकी बात पहुंच जाएगी। और वे सर्व स्वीकृत नेता बन जाएंगे।
मुस्लिम समुदाय के बारे में बात करने से बचे राहुल मुस्लिम बुद्धिजीवियों का आगे कहना था कि विशेष समुदाय को लेकर अगर राहुल किसी तरह की बात करते हैं, तो इससे दूसरे समुदाय के लोग एकत्रित हो सकते हैं। इससे ध्रुवीकरण होने का खतरा बना रहता है।
लेकिन राहुल अगर गरीबी और शिक्षा जैसे मुद्दों के साथ आगे बढ़ते हैं, तो इससे अन्य भारतीयों की तरह 96 फीसदी मुसलमानों को प्रभावित करेगा।


बैठक के दौरान राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी का आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दी गई। हबीब ने आगे कहा कि 1970 के दशक में कांग्रेस जिस तरह का काम करती थी, राहुल वैसा ही करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को समावेशी और साझा विरासत की बात करनी चाहिए।

किसी अन्य मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई इलियास ने कहा कि अन्य राजनीतिक मुद्दों के बीच मुस्लिम समुदाय ने आने वाले चुनावों और व्यक्तिगत कानून बोर्ड के संबंध में कुछ भी राहुल से चर्चा नहीं हुई।

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उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत कानून बोर्ड (पर्सनल लॉ बोर्ड) के बारे में कोई बात नहीं की, क्योंकि यह मामला अदालत में है।

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