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अफगानिस्तान में बुद्ध फिर मुस्कुराए, तालिबान हारा

हैदराबाद। साल 2007 में तालिबान ने अफगानिस्तान स्थित बुद्ध की एक पुरानी प्रतिमा तोड़ दी थी। प्रतिमा स्वात घाटी में एक चट्टान पर उकेरी गई थी। लगभग 11 साल बाद इस प्रतिमा को फिर से स्थापित कर दिया गया है। दूसरे देशों ने इसमें पूरा सहयोग किया।

गौतम बुद्ध की प्रतिमा।


बुद्ध की यह प्रतिमा अफगानिस्तान में फिर से शांति, सहिष्णुता और सौहार्द का प्रतीक बनती जा रही है। साल 2001 में तालिबानी फोर्सेस ने बामियान में बुद्ध की प्रतिमा नष्ट कर दी थी। 2007 में भी कुछ इसी तर्ज पर बुद्ध की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। आतंकियों ने इसे उड़ाने के लिए डायनामाइट का उपयोग किया था।



अफगानिस्तान में गौतम बुद्ध की प्रतिमा।
बुद्धिज्म मामलों के जानकार का कहना है कि बुद्ध की मूर्ति का नष्ट होने का मतलब था कि यहां की संस्कृति और इतिहास पर चोट। लिहाजा, हर हाल में इसे दोबारा बनाया जाना आवश्यक था। आखिर दुनिया को संदेश भी तो देना था। ईटली ने इस कार्य में पूरा सहयोग किया।
अंग्रेजी न्यूज एजेंसी के मुताबिक ईटली ने 25 लाख यूरो यानि करीब 20 करोड़ रुपए का सहयोग किया। पांच साल का समय लगा।

जानकारों का कहना है कि त्रि-डी प्रिंटिंग की मदद ली गई है। बुद्ध की पुरानी तस्वीरों का उपयोग किया गया। बुद्ध का चेहरा त्रि-डी लैब में बनाया गया।

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कलाकारों का कहना है कि बुद्ध के चेहरे में कुछ कमी जानबूझकर रखी गई है, ताकि यहां आने वालों को ये पता रहे कि कभी आतंकियों ने यहां आकर बर्बर कार्रवाई की थी।

स्थानीय प्रशासन का दावा है कि मूर्ति का प्रोजेक्ट लगभग पूरा होने वाला है। उसके बाद पर्यटन की भी उम्मीद की जा सकती है।

आपको बता दें कि बुद्ध की यह प्रतिमा 20 फीट ऊंची थी। तालिबान के इस कुकृत्य के बाद स्वात घाटी में आतंक की शुरुआत हो गई थी।



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