• A
  • A
  • A
गुजरात दंगों पर खुलासा: सेना ने किया 30 घंटों का इंतजार !

नई दिल्ली: गुजरात दंगा भारतीय इतिहास में एक काला अध्याय माना जाता है. दंगों को नियंत्रित करने के लिए ले. जन. जमीरउद्दीन शाह (अब सेवानिवृत्त) ने भारतीय सेना की अगुआई की थी. उन्होंने अपनी किताब में चौंकाने वाले खुलासे किये हैं.

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जमीर उद्दीन शाह से हुई खास बातचीत. (देखें वीडियो)


दरअसल, रिटायर्ड जनरल जमीरउद्दीन शाह ने 'दी सरकारी मुसलमान' शीर्षक से एक किताब लिखी है. इसमें शाह ने कहा है कि दंगे भड़कने के एक दिन बाद सेना अहमदाबाद हवाईअड्डे पर पहुंच गई थी.
सेना ने किया 30 घंटों का इंतजार
शाह ने लिखा है कि अहमदाबाद पहुंचने के बाद सेना को 30 घंटों तक इंतजार करना पड़ा. इस दौरान उनके पास न लॉजिस्टिक्स (रसद और सैन्य तंत्र) सपोर्ट था और न परिवहन के साधन.
दंगा प्रभावित इलाके के दौरे पर सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जीएस सिहोटा (दाएं)

शाह के किताब की आलोचना !
बता दें कि जनरल शाह की ये बातें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट से अलग है. SIT की रिपोर्ट से अलग राय रखने पर ईटीवी भारत ने जनरल शाह से खास बातचीत की. शाह ने अपने संस्मरण 'दी सरकारी मुसलमान' की आलोचना किए जाने पर आश्चर्य जताया. उन्होंने दावा किया कि अपनी किताब में उन्होंने सिर्फ सच लिखा है.


कुलपति भी रह चुके हैं शाह
बता दें कि जनरल शाह पूर्व वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के अलावा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कुलपति के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. ईटीवी से बातचीत के दौरान शाह ने कहा कि लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के अभाव में सेना करीब 30 घंटों तक संघर्ष कर रही थी. इस दौरान दंगा प्रभावित इलाकों में गश्ती के लिए गाड़ियों की भी व्यवस्था नहीं थी. ऊंची इमारतों में उनके रेडियो सेट भी नहीं काम कर रहे थे.
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह
28 फरवरी को भड़का था दंगा
शाह ने कहा 'अहमदाबाद एयर फील्ड पहुंचने के 24 घंटों से ज्यादा समय बीतने के बाद रसद के अभाव में सेना हताश हो रही थी. 28 फरवरी को दंगा भड़का था, लेकिन सेना एक दिन बाद तैनात की गई थी.'

गुजरात के लोगों से बातचीत करते लेफ्टिनेंट जनरल जीएस सिहोटा और कुछ लेखक

दंगों पर काबू पाने में लगे 48 घंटेदंगा रोकने के प्रयासों पर शाह ने कहा 'विडंबना यह थी कि सेना को मदद दो मार्च को मिली. इसके बाद सेना ने अगले 48 घंटों में किसी तरह दंगों पर काबू पाया.' विवाद पर आश्चर्य जताते हुए शाह ने कहा 'किताब में मैंने दंगों के दौरान के हालात पर अपने अनुभव लिखे हैं, किसी को भी सच बोलने से डरना नहीं चाहिए.'
क्या है SIT का दावा
बताया जाता है कि SIT ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि एक मार्च को सेना को पूरी लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मुहैया करा दी गई थी. SIT की रिपोर्ट में जिक्र है कि सेना को दंगा प्रभावित इलाकों में भेजने के फौरन बाद पूरा सपोर्ट दिया गया था.
पढ़ें: PAK की नापाक हरकत, फिर किया सीजफायर का उल्लंघन
सबसे वीभत्स में एक है गुजरात दंगा !
SIT की रिपोर्ट पर एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा 'SIT ने दावा किया है कि 28 फरवरी को सेना तैनात की गई थी. ऐसा नहीं है. सच ये है कि सेना एक मार्च को तैनात की गई थी, इसके बाद दो मार्च को सैन्य कार्रवाई शुरू हुई थी.' बता दें कि शाह की अगुवाई में सेना की टुकड़ी ने गुजरात दंगों के नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई थी. इसे इतिहास के सबसे वीभत्स में से एक दंगा माना जाता है.

नरेंद्र मोदी भी रहे कठघरे के घेरे में
तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी लंबे समय तक इस कारण कठघरे में रहे. हालांकि, जांच के बाद उन्हें तमाम मामलों में क्लीन चिट भी मिली है. किताब लिखे जाने के दौरान सरकार के खिलाफ खुलासे या किसी डर के सवाल पर शाह ने कहा 'उन्हें सच बोलने से डर नहीं लगता, अंजाम चाहे कुछ भी हो.'

शाह के संस्मरण की बुक कवर

किताब में किसी के खिलाफ नहीं लिखा है
शाह ने कहा 'अपनी किताब 'दी सरकारी मुसलमान' में मैंने किसी के खिलाफ कुछ भी नहीं लिखा है. सच हमेशा बरकरार रहना चाहिए. मैंने कोई राजनीतिक बयान भी नहीं दिया है. मेरा प्रयास लोगों से सामने सच लाने का है.' उन्होंने कहा कि देश के कानून पर उन्हें पूरा यकीन है, सच सामने आएगा.'

मोदी सहित 62 अन्य सरकारी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे की अपील
रिटायर्ड जनरल शाह की किताब में किए गए खुलासे पर तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा है कि इससे हम जो बात लंबे समय से कह रहे हैं, इसकी पुष्टि होती है. बता दें कि गुजरात दंगे से जुड़े केस में तीस्ता एक सह-याचिकाकर्ता हैं. उक्त याचिका में तत्कालीन CM नरेंद्र मोदी के अलावा 62 राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने की अपील की गई है. याचिकाकर्ताओं ने दंगों में सहभागिता का आरोप लगाया है.
सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड
2006 से लंबित है जाफरी का केस
तीस्ता ने बताया 'वर्ष 2006 से जकिया जाफरी का केस अदालत में लंबित है. जकिया 56 वर्षीय सिविल राइट एक्टिविस्ट हैं.' उन्होंने कहा 'शाह की किताब जकिया केस में हमारे पक्ष की पुष्टि करती है.' जकिया केस में सबूतों का जिक्र करते हुए तीस्ता ने कहा '8 अगस्त, 2006 को शिकायत दर्ज कराते समय उनके पास गुजरात पुलिस की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट थी.' उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में राज्य के गृह विभाग के रिकॉर्ड और पुलिस अधिकारियों के शपथपत्र भी संलग्न हैं.

तत्कालीन जनरल जमीरउद्दीन शाह दे भी दिया अपना बयान
तीस्ता ने बताया '15 अप्रैल, 2013 को दायर प्रोटेस्ट याचिका में अनुसंधान के सभी कागजात और 24 हजार पन्नों के रिकॉर्ड का जिक्र किया गया है.' उन्होंने कहा कि अब तत्कालीन जनरल जमीरउद्दीन शाह का भी बयान सामने आया है.

पढ़ें: #Rafael सीतारमण की फ्रांस यात्रा पर राहुल ने उठाए सवाल
SIT ने किया अहम कागजी सबूतों को अनदेखा
SIT रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए तीस्ता ने कहा 'आर के राघवन के नेतृत्व में बनाई गई SIT ने अनुसंधान का उपहास किया था. SIT ने कई अहम कागजी सबूतों को अनदेखा किया.' बता दें कि राघवन वर्तमान में साइप्रस में भारतीय राजदूत के पद पर हैं. तीस्ता ने कहा 'जकिया और मेरे बयान 2009 में लिए गए. इस समय जनरल शाह के बयान क्यों नहीं लिए गए.' उन्होंने कहा कि अब भारतीय अदालतों को इस मामले पर फैसला करना है.

कांग्रेस के विधायक एहसान की हत्या की गई
बताया जाता है कि SIT की इन्क्वायरी रिपोर्ट में लिखा है कि 'सेना की तैनाती में गैर जरूरी देर की गई थी.' ये रिपोर्ट जकिया जाफरी के केस में कोर्ट में जमा की गई है. उक्त केस कांग्रेस के विधायक एहसान जाफरी की हत्या से जुड़ा है. दंगों के दौरान गुलबर्ग हाउसिंग सोसायटी संख्या 16 में भीड़ में शामिल लोगों ने एहसान की हत्या कर दी थी.
नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीन चिट
SIT की रिपोर्ट में तत्कालीन CM नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी गई थी. बताया जाता है कि इस रिपोर्ट में तत्कालीन अतिरिक्त गृह सचिव अशोक नारायण के बयान के आधार पर लिखा गया है 'सेना की तैनाती में गैर जरूरी देर नहीं हुई थी.'

SIT ने शाह से नहीं की कोई पूछताछ
बताया जाता है कि SIT ने रिटायर्ड जनरल शाह से कभी पूछताछ नहीं की. दंगों के दौरान की गई सैन्य कार्रवाई के बाद शाह ने एक आफ्टर एक्शन रिपोर्ट (AAF) भी जमा की थी. इसे तत्कालीन सेना प्रमुख एस पद्मनाभन को दिया गया था. बाद में ये केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजी गई थी.


CLOSE COMMENT

ADD COMMENT

To read stories offline: Download Eenaduindia app.

SECTIONS:

  होम

  राज्य

  देश

  दुनिया

  कारोबार

  क्राइम

  खेल

  मनोरंजन

  इंद्रधनुष

  सहेली

  गैलरी

  टूरिज़्म

  ASSEMBLY ELECTIONS 2018

  MAJOR CITIES