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जानें, आलोक वर्मा के खिलाफ क्या है सीवीसी की रिपोर्ट

नई दिल्ली: केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच रिपोर्ट में आलोक वर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप हैं. यह सीबीआई के 50 साल के इतिहास में अपने तरीके का पहला मामला है. इस रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और कतर्व्य निर्वहन की लापरवाही का आरोप है.

सीवीसी चीफ केवी चौधरी और आलोक वर्मा


सीवीसी की जांच रिपोर्ट में खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ द्वारा की गई ‘टेलीफोन निगरानी’ का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट में वर्मा पर आठ आरोप लगाए गए हैं.
हैदराबाद के कारोबारी पर नरम रहे वर्मा !
सीवीसी रिपोर्ट में विवादित मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले का जिक्र किया गया और दावा किया गया कि इस मामले पर गौर कर रही सीबीआई टीम हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना को इस मामले में आरोपी बनाना चाहती थी, लेकिन वर्मा ने मंजूरी नहीं दी.

सीवीसी रिपोर्ट का पेज एक

भूमि अधिग्रहण मामले में वर्मा का नाम !
एक अन्य मामला सीबीआई द्वारा गुड़गांव में भूमि अधिग्रहण के बारे में दर्ज शुरुआती जांच से संबंधित है. सीवीसी ने आरोप लगाया कि इस मामले में वर्मा का नाम सामने आया था. सीवीसी ने इस मामले में विस्तृत जांच की सिफारिश की थी.
आरोपी को बचाने का आरोप
सीवीसी ने यह भी आरोप लगाया था कि वर्मा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री लालू प्रसाद से जुड़े आईआरसीटीसी मामले के एक अधिकारी को बचाने का प्रयास भी किया था.

सीवीसी रिपोर्ट का पेज एक
सीवीसी के सामने पेश नहीं हुए आलोक वर्मा
सीबीआई को कहा गया था कि लालू से जुड़े इन आरोपों के संबंध में 14 सितंबर 2018 को सीवीसी के सामने जरूरी फाइल और दस्तावेज पेश करें. लेकिन सीबीआई निदेशक ने इसका पालन नहीं किया.
दागी अधिकारियों को संरक्षण
आयोग ने यह भी आरोप लगाया कि वर्मा सीबीआई में दागी अधिकारियों को लाने की कोशिश कर रहे हैं. आरोप लगाया गया कि सीबीआई प्रमुख से सहयोग पाने के प्रयास के कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि वह अपनी फाइलों को सीवीसी की पहुंच से दूर रख रहे.

कर्तव्य का निर्वहन नहींसीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कैबिनेट सचिव ने 24 अगस्त 2018 को शिकायत दी थी. इसके आधार पर आलोक वर्मा से रिकॉर्ड पेश करने को कहा गया. लेकिन 40 दिन बीत जाने के बाद भी वे रिकॉर्ड नहीं पेश कर सके. लिहाजा, सीवीसी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर पा रही थी.
इमरजेंसी जैसे हालात
सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सीबीआई में इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं. आपको बता दें कि दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट सीवीसी को सीबीआई की निगरानी करने का अधिकार देता है.

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