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साड़ी पहन 13 हजार फीट से लगाई छलांग, बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। थाईलैंड में साड़ी पहनकर 13,000 फीट की ऊंचाई से स्काइडाइविंग करने वाली पहली भारतीय महिला शीतल राणे महाजन भारत सरकार से गुहार लगाकर कहती हैं कि सरकार देश में स्काइडाइविंग को खेल का दर्जा देने में अब देर न करे। महाराष्ट्र की नौवारी साड़ी पहनकर इतिहास रच चुकीं शीतल का अगला पड़ाव अंतरिक्ष और एवरेस्ट है। वह कहती हैं कि अब मैं अंतरिक्ष और एवरेस्ट से स्काइडाइविंग कर देश का नाम रोशन करना चाहती हूं।

भारतीय महिला स्काइडाइवर शीतल राणे महाजन


शीतल महिलाओं में स्काइडाइविंग को लेकर जागरूकता फैलाने के मकसद से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नौवारी साड़ी में ही स्काइडाइविग करने की इच्छा रखती हैं। शीतल ने बैंकॉक से आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में अपनी इस उपलब्धि के बारे में कहा, "मैं देश के लिए कुछ अलग करना चाहती थी। मैंने स्काइडाइविंग में 17 राष्ट्रीय रिकॉर्ड और छह विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। मैं स्काइडाइविंग में होने वाली प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के साथ वैश्विक मंच पर भारतीय महिलाओं का परचम लहराना चाहती हूं। मेरा सपना है, मैं दुनिया को बताऊं कि यदि भारतीय महिलाओं को मौका मिले तो वह कुछ भी कर सकती हैं।"


शीतल (35) अपने शुरुआती सफर से रू-ब-रू कराते हुए कहती हैं, "मैंने अपनी पहली स्काइडाइविंग बिना किसी प्रशिक्षण के उत्तरी ध्रुव में की थी, उस वक्त तापमान माइनस 38 डिग्री सेल्सियम था। मैं उत्तरी ध्रुव में बिना किसी प्रशिक्षण के स्काइडाइविंग करने वाली पहली महिला बनी। इसके बाद अंटार्कटिका में स्काइडाइविंग की। मेरे नाम छह विश्व रिकॉर्ड है।"

यह पूछने पर कि साड़ी पहनकर स्काइडाइविंग करने का ख्याल कैसे आया? वह कहती हैं, "मैं मराठी मुलगी हूं। पुणे के लिए, मराठी लोगों के लिए भी कुछ करना चाहती थी। जनवरी के पहले सप्ताह में जब मराठी सप्ताह शुरू हुआ, तब मैंने साड़ी में स्काइडाइविंग करने के बारे में सोचा। सामान्य साड़ियों में जंप करना आसान नहीं होता, इसलिए मैंने नौवारी साड़ी में ऐसा करने का फैसला किया। वजह यह कि इसमें दोनों तरफ प्लेट होती हैं। हालांकि, नौवारी साड़ी में जंप करना जोखिम भरा भी है। साड़ी का पल्लू कभी भी निकलकर पैराशूट में फंस सकता है, लेकिन मैंने सावधानी बरती। साड़ी को पिनअप करने के साथ इसे टेप से भी चिपकाया। इसके बाद 13,000 फीट की ऊंचाई से जंप किया।"

कई अनोखे कीर्तिमान स्थापित कर चुकीं शीतल खुद को लंबी रेस का घोड़ा बताते हुए कहती हैं, "मैं अंतरिक्ष और एवरेस्ट से स्काइडाइविंग करना चाहती हूं। स्काइडाइविंग वल्र्ड चैंपियनशिप 2018 में भारत का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा है, लेकिन इसके लिए पहले भारत सरकार को देश में स्काइडाइविंग को खेल का दर्जा देना होगा। सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिलती। मुझे प्रायोजकों की सख्त जरूरत है, क्योंकि हर साल मैं अपनी जेब से चार से पांच लाख रुपये खर्च करती हूं।"

वह कहती हैं, "स्काइडाइविंग को देश में खेल के तौर पर मान्यता नहीं है। मैं चाहती हूं कि भारत सरकार को इसे मान्यता देनी चाहिए। जिस तरह से क्रिकेट का आईपीएल और विश्वकप होता है, ठीक वैसे ही स्काइडाइविंग के भी मैच और विश्वकप होते हैं। भारत में इसे लेकर जानकारी और दिलचस्पी दोनों का अभाव है।"

यूं तो सरकार ने शीतल को उनकी उपलब्धियों के लिए 2011 में देश के चौथे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया है, लेकिन शीतल इतने से खुश नहीं हैं। वह कहती हैं, "मैंने 2017 में सभी सात महाद्वीपों में स्काइडाइविंग कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। मैं ऐसा करने वाली पहली महिला हूं, लेकिन सरकार से सराहना का एक शब्द सुनने को नहीं मिला। बुरा लगता है कि पूरी दुनिया आपको सराह रही है, लेकिन आपकी सरकार चुप्पी साधे बैठी है।"

शीतल ने महिला दिवस के लिए अलग तरह की योजना बनाई है। वह इन योजनाओं से वाकिफ कराते हुए कहती हैं, "यदि सरकार मंजूरी दे तो मैं महिला दिवस पर इसी साड़ी में पुणे में स्काइडाइविंग करना चाहूंगी। मैं महिला सांसदों सहित देशभर की महिलाओं को इसका गवाह बनने के लिए आमंत्रित करना चाहूंगी।"

शीतल कहती हैं, "स्काइडाइविंग नेशनल क्लब ने वल्र्ड गोल्ड मेडल के लिए मेरे नाम की अनुशंसा की थी, लेकिन मेरा नामांकन यह कहकर खारिज कर दिया गया कि मुझे सात महाद्वीपों पर स्काइडाइविंग पूरा करने में 10 साल लगे। हालांकि, मेरे बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए मुझे एक साल में छह महाद्वीपों पर स्काइडाइविंग करने को कहा गया। इस वजह से मैंने 19 फरवरी, 2016 को इस सफर की शुरुआत की और दक्षिण अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया और अब एशिया में इस चैलेंज को पूरा किया। मैंने 10 फरवरी 2017 को इन महाद्वीपों पर स्काइडाइविंग का चैलेंज पूरा किया।"

शीतल सरकार के अलावा मीडिया के काम करने के रवैए पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, "मीडिया को जिम्मेदार ढंग से काम करना चाहिए। यदि कोई भी शख्स किसी भी खेल या अन्य विधा में किसी भी तरह का कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, तो मीडिया को उसे तवज्जो देनी चाहिए, तभी बाकियों को भी प्रेरणा मिलेगी। मैंने नौवारी साड़ी पहनकर स्काइडाइविंग की, तो मीडिया को यह दिलचस्प लगा, वरना तो सब ढाक के तीन पात ही थे।"

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