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बिहार की राजनीति में फिर आने वाला है 'तूफान', इस तारीख का हो रहा है इंतजार!

पटना। बिहार में बजट सत्र से पहले राजनीतिक तौर पर उथल-पुथल देखने को मिल सकता है। लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद से राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नेतृत्व से नाराज नेता अपने राजनीतिक फायदे के चक्कर में पाला बदलने की तैयारी में हैं। राजद और कांग्रेस में टूट की आशंका बरकरार है।

डिजाइन इमेज।


हिंदू रीति-रिवाज के मुताबिक 14 जनवरी से पहले शुभ कार्य की शुरुआत नहीं होती है। राजनेता भी इस परंपरा में आस्था रखते हैं। बिहार में 14 जनवरी से बजट सत्र के बीच राजनीति में काफी उलटफेर देखने को मिल सकती है। बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है।


बिहार विधानमंडल (फाइल)

लालू प्रसाद यादव के जेल जाने का असर बिहार की राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है। राजद के बीच नेताओं की गतिविधि तेज हो गई है, जिन नेताओं को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में काम करने से परहेज है, वह पाला बदलने के फिराक में हैं।

राजद कोटे से मंत्री रह चुके कद्दावर नेता नीतीश कुमार के संपर्क में हैं। इसके अलावा राजद कोटे से नालंदा जिले से एक विधायक भी लगातार जदयू के शीर्ष नेताओं से मिल रहे हैं। सहरसा में कार्यक्रम के दौरान राजद विधायक अरुण यादव ने जमकर नीतीश कुमार की तारीफ भी की थी। पटना जिले के एक राजद विधायक जो बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं, वह भी जदयू के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं।

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इधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी समीक्षा यात्रा के दौरान अलग से राजद विधायकों के साथ मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो फिलहाल दर्जन भर से ज्यादा विधायक जदयू के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं। बजट सत्र से पहले नाराज नेताओं की संख्या बल अगर पर्याप्त हो जाती है, तो वैसी स्थिति में राजद में सेंधमारी संभव है।

इधर, कांग्रेस पार्टी के अंदर भी नाराज नेताओं की गतिविधियां थमी नहीं है। नेता रोडमैप बनाने में जुटे हैं। कांग्रेस पार्टी के अंदर नाराज नेताओं की संख्या 18 पूरी नहीं होने के चलते टूट संभव नहीं हो पाई थी, लेकिन बजट सत्र से पहले कांग्रेस पार्टी में उथल-पुथल देखने को मिल सकता है।

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पार्टी से नाराज चल रहे अशोक चौधरी के साथ लगातार नाराज विधायकों ने संपर्क बनाया हुआ है। यह तमाम वैसे विधायक हैं जो तेजस्वी यादव का नेतृत्व स्वीकार करना नहीं चाहते हैं। संख्या बल के चलते अगर विधायक दल में टूट नहीं भी हो तो ऐसी स्थिति में पार्टी के चार एमएलसी अशोक चौधरी के नेतृत्व में जदयू खेमे में जा सकते हैं। कांग्रेस में टूट तभी संभव है, जब उनके नेताओं की एनडीए में एंट्री के लिए बीजेपी सहमत हो।


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