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12 जुलाई को नियोजत शिक्षकों के पक्ष में आ सकता फैसला!

पटना। बिहार के करीब 4 लाख नियोजित शिक्षकों की बेचैनी चरम पर है। समान काम के लिए समान वेतन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 12 जुलाई को अंतिम सुनवाई संभावित है। इसे लेकर नियोजत शिक्षक टकटकी लगाए हैं। वहीं, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पांडेय ने नियोजत शिक्षकों के पक्ष में फैसला आने की उम्मीद जताई है।

केदारनाथ पांडेय का बयान।


इस बीच नियोजित शिक्षकों का समूह अपनी ओर से पूरी तैयारी भी कर रहा है। कई शिक्षक संघों के नेता दिल्ली में डेरा डाले हैं और बड़े वकीलों से संपर्क किया जा रहा है। बता दें कि नियोजित शिक्षकों के मामले में पिछले साल पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था। साथ ही पिछला बकाया वर्ष 2009 से एरियर के रूप में देने का आदेश भी हाईकोर्ट ने दिया था। इसके बाद बिहार सरकार ने हाथ खड़े करते हुए सुप्रीम कोर्ट चली गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की मांग को माना जायजइधर नियोजत शिक्षकों ने भी सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर कर अपनी बात रखी थी। इसके बाद पिछली सुनवाई में भी सु्प्रीम कोर्ट का रुख नियोजत शिक्षकों के पक्ष में रहा था और सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कहा था कि उन्हें समान काम समान वेतन लागू करना होगा और वे इसे कैसे लागू करेंगे इसके बारे में कोर्ट को बताएं।
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केदारनाथ पांडेय ने जताई फैसले पर उम्मीद अब इस मामले में 12 जुलाई को अहम फैसला आ सकता है। बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदार नाथ पांडे ने कहा कि पूरी संभावना है कि नियोजत शिक्षकों के पक्ष में फैसला आए। उन्होंने कहा कि पटना हाईकोर्ट के फैसले से साफ है कि नियोजित शिक्षकों की मांग पूरी तरह जायज है। आखिर एक ही स्कूल में एक शिक्षक का वेतन पचास हजार और एक का 18 हजार कैसे हो सकता है। यही नहीं, उसी स्कूल के चपरासी का वेतन भी 35 हजार से ज्यादा है।

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