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सरकार के बनाए नेशनल हाईवे को उखाड़ फेंकेगा ये किसान, दो पीढ़ियों ने लड़कर जीता कोर्ट से केस

यमुनानगर. जिले में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है. दरअसल सन 1951 में बने अंबाला-जगाधरी रोड (पुराना नेशनल हाईवे-73) के लिए कब्जाई जमीन छुड़ाने के लिए दो पीढ़ियों को लड़ना पड़ा.

सरकार के बनाए नेशनल हाईवे को उखाड़ फेंकेगा ये किसान


आपको ये जानकर हैरत हो सकती है कि अब 68 साल बाद कोर्ट में केस जीता तो जमीन वापस मिल सकेगी. ऐसे में ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि यह रोड कैल से जगाधरी के बीच कभी भी बंद हो सकता है.
आपको बता दें कि यह रोड हरीपुर जट्टान मोड़ से कचरा प्लांट तक करीब 9 बीघे में किसान की जमीन पर बनी है.
किसान कोर्ट से केस जीत चुका है और कोर्ट उसे कब्जा लेने के आदेश भी दे चुका है. किसान कश्मीरी सिंह ढिल्लों ने कहा है कि सोमवार या मंगलवार को वे सड़क को उखड़वा देंगे, अर्थ मूविंग मशीन तैयार खड़ी है.
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि सड़क के पास ही करीब 100 फीट चौड़ी सरकारी जमीन है. उस पर अगले कुछ दिनों में नई रोड बना दी जाएगी. तब तक दादूपुर-नलवी नहर के साथ-साथ बने रोड से ट्रैफिक निकालने की कोशिश होगी. यह रोड जगाधरी-यमुनानगर को नए बाइपास से जोड़ता है.
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जमीन मालिक का कहना है कि पहले जमीन पर जंगल था. जमीन के बीच से कच्चा रास्ता था. साल 1951 में कच्चे रास्ते पर रोड बना दिया गया. जमीन के मालिक का कहना है कि संयुक्त पंजाब के समय में पिता व चाचा सरकार व विभाग को पत्र लिखते रहे कि यह सड़क हमारी जमीन पर बनी है. 50 साल में जाने कितनी चिट्ठियां लिखी, पर किसी ने बात नहीं सुनी.
किसान के मुताबिक उनके चाचा बलबीर साल 2000 में कोर्ट चले गए. 2016 में सेशन कोर्ट ने हमारे हक में फैसला सुनाया. इस फैसले के खिलाफ सरकार ने रिव्यू पिटिशन डाली, लेकिन कोर्ट ने फैसला नहीं बदला. उन्होंने बताया कि अफसरों ने जमीन के बदले दूसरी जमीन देने का ऑफर भी दिया, हालाकि हम इसके लिए तैयार नहीं हैं.
उल्लेखनीय है कि फैसला लागू कराने के लिए न्यायाधीश सुनील कुमार के कोर्ट में 2 साल सुनवाई चली. अक्टूबर में कोर्ट ने 16 नवंबर तक रोड पर कब्जा देने के आदेश दिए. अपनी जमीन का केस जीत चुके किसान ने बताया कि सरकार ने अभी कब्जा नहीं दिया, लेकिन अब हम कब्जा लेंगे. सरकार ने करीब 70 साल हमारी जमीन का इस्तेमाल किया है, उसके मुआवजे के लिए भी लड़ेंगे.

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