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भाजपा के लिए चुनावी मुसीबत न बन जाए 'आनंदपाल', राजपूतों ने किया 'बगावत' का ऐलान

एनकाउंटर में मारे जाने के बावजूद गैंगस्टर आनंदपाल सरकार के लिए मुसीबत बनता हुआ नजर आ रहा है। एक बार फिर आनंदपाल के मसले पर मौजूदा सरकार के खिलाफ राजपूत समाज ने एकजुट होकर हुंकार भरने का ऐलान किया है।

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जयपुर।
आनंदपाल एनकाउंटर केस को एक साल पुरा होने जा रहा है। लेकिन आनंदपाल केस से आहत राजपूत और रावणा राजपूतों के बगावती सुर सरकार के लिए नई मुसीबत बनते नजर आ रहे हैं। दरअसल राजपूत और रावणा राजपूत समाज की ओर से आज ये घोषणा की गयी है कि आनंदपाल की मौत के एक साल होने और अब तक उसे न्याय नही मिलने पर 24 जून को उसकी पूण्यतिथी के रूप में मनाया जाएगा।


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इस दिन पूरे राजस्थान में समाज की ओर से रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। केस में अब तक न्याय नहीं मिलने के आरोंपों के साथ राजपूत समाज का कहना है कि भाजपा को जिताना उनकी गलती रही थी। जिसे वो उपचुनावों में सुधार चुके हैं। आगामी विधानसभा चुनावों में वो भाजपा को सबक सिखाकर ही रहेंगे।

निकालेंगे वसुन्धरा प्रतिघात रैली
सर्व समाज संघर्ष समिती का कहना है कि राजस्थान की भाजपा सरकार राजपूतो की सुध नही ले रही है। ऐसे में एक बार फिर राजपूत समाज भाजपा के खिलाफ खडा होगा। सर्वसमाज संघर्ष समिती के प्रवक्ता दुर्ग सिंह खींवसर ने कहा कि 24 जून को पहले आनंदपाल की मौत के एक साल को सामाजिक सदभावना के रूप में मनायेंगे।
उसके बाद 25 जून से 15 अक्टूबर तक राजस्थान में तहसील और जिला स्तर के सम्मेलन करेंगे। उसके बाद 21 अक्टूबर 2018 को लाखों की संख्या में एकत्र होकर वसुंधरा प्रतिघात रैली आयोजित की जाएगी।

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राजपूत विधायकों को पहनाएंगे जूतों की माला
राजपूत सामाज की एक और संस्था राष्ट्रिय राजपूत करणी सेना ने भी इसी मुद्दे की आड़ में वसुंधरा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान कर दिया है। राष्ट्रीय करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव गोगामेड़ी ने कहा कि विरोध की शुरूआत राजस्थान के उन राजपूत विधायकों और मंत्रियों से की जायेगी। जिन्होने हर मुददे पर समाज से मुह फेरा है।

गोगामेड़ी ने कहा कि करणी सेना अब इन राजपूत विधायक-सांसदों को गांवों में नही घुसने देगी। अगर ऐसे नेताओं का बहिष्कार करने के साथ ही विरोध के रूप में जूतों की माला भी पहनानी पड़ी तो वो भी करेंगे।

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दो की हुई थी मौत
आनंदपाल एनकाउंटर के बाद लगभग एक महीने तक राजस्थान में विरोध प्रदर्शन हुए। आनंदपाल के गांव सांवराद में हुई सभा में जमकर हंगामा हुआ था जिसमें दो युवकों की जान भी चली गयी थी। सांवराद में हुई हिंसा के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस दर्ज किये गये थे।

अब राजपूत नेताओ का कहना है कि जब कश्मीर में पत्थरबाजों को केस वापस लिये जा सकतें है तो फिर सांवराद हिंसा के दौरान जिन यूवकों पर केस दर्ज किये गये है उन्हे वापस क्यों नही लिया जा सकता है।


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