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मानवेन्द्र के घर वापसी के संकेत

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम चुके मानवेंद्र सिंह को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. इन चर्चाओं के बीच उनकी घर वापसी के संकेत मिलने लगे हैं....

कांसेप्ट इमेज.


जयपुर . विधानसभा चुनाव से पहले स्वाभिमान की खातिर भाजपा से दशकों पुराना रिश्ता तोड़कर कांग्रेस का दामन थाम चुके मानवेंद्र सिंह की घर वापसी हो सकती है. कांग्रेस में जाने के बाद बदले सियासी समीकरण के बीच जहां इसके संकेत मिलने लगे हैं. वहीं, सियासी हलकों में चर्चाओं के साथ ही कयासों का दौर भी तेज हो गया है.
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दरअसल, विधानसभा चुनाव के दरमियान कांग्रेस का दामन थामने के बाद सियासी तौर पर कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसके चलते मानवेंद्र सिंह अंदरखाने नाराज चल रहे हैं. उनकी इस नाराजगी को लेकर ऊपरी तौर पर अभी तक कुछ सामने नहीं आया है. लेकिन, अंदरखाने सियासत सुर्ख बनी हुई है. माना जा रहा है कि कांग्रेस में शामिल होने के बाद मानवेंद्र को पार्टी के भीतर वो सम्मान नहीं मिल पा रहा है, जिसकी आस उन्होंने पार्टी में शामिल होते समय लगाई थी. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले मानवेंद्र एक बार फिर अपने पुराने घर में लौट सकते हैं. मौजूदा हालात और मानवेंद्र की नाराजगी के बीच अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी फेरबदल मानवेंद्र की घर वापसी के रूप में देखने को मिल सकता है. राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के दौरान जिस तरह से कांग्रेस के आला नेताओं का जमावड़ा लगा था.

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उसे देखते हुए कांग्रेस के भीतर मानवेंद्र सिंह के प्रभावी भूमिका को लेकर कई कयास लगाए जा रहे थे. माना जा रहा था कि मानवेंद्र सिंह कांग्रेस की तरफ से राजनीतिक रूप से बड़ी जिम्मेदारी निभाते हुए पार्टी को मजबूत करेंगे. लेकिन, अभी तक ऐसा हो नहीं पाया है. जानकारों का कहना है कि कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही कई ऐसे मौके आए जब मानवेंद्र को उनकी हैसियत के मुताबिक पार्टी के भीतर स्थान नहीं मिल पाया. जिसके चलते वे अंदरखाने नाराज बने हुए हैं. विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में शामिल होने के तुरंत बाद राजस्थान में हुई पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा में मंच पर मानवेंद्र को दूसरी पंक्ति में जगह मिली थी. इसके बाद से सियासी चर्चाओं का दौर तेज हो गया था. वहीं, उसके बाद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा होने के बाद भी मानवेंद्र सिंह को झालावाड़ सीट पर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के सामने मैदान में उतार दिया गया. पार्टी के इस निर्णय को मानते हुए मानवेंद्र सिंह ने झालावाड़ में राजे के सामने चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

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मानवेंद्र को बाड़मेर से झालावाड़ ले जाकर चुनाव मैदान में उतारने को लेकर पार्टी स्तर पर किए गए इस निर्णय को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों ने भी हैरानी जताई थी. वहीं, इस चुनाव के बाद अब मानवेंद्र सिंह लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। वे बाड़मेर-जैसलमेर से चुनाव लड़ने के संकेत दे चुके हैं. इसको लेकर वे अपने संसदीय क्षेत्र में लगातार दौरे भी कर रहे हैं. उनके समर्थक भी लगातार ये संदेश दे रहे हैं। वहीं, सूत्रों का कहना है कि मानवेंद्र की तैयारी से इतर कांग्रेस के भीतर यह चर्चा भी चल रही है कि उन्हें बाड़मेर-जैसलमेर की जगह जोधपुर या जालौर-सिरोही सीट से मैदान में उतारा जाए. जबकि, बाड़मेर-जैसलमेर सीट से गहलोत सरकार में मंत्री हरीश चौधरी का नाम चर्चा में आगे बना हुआ है. जानकारों का कहना है कि पार्टी के भीतर जारी इन सियासी चर्चाओं के बीच मानवेंद्र की नाराजगी लगातार बनी हुई है. माना जा रहा है कि यही वजह रही है कि हाल में सीएम अशोक गहलोत के सीमावर्ती क्षेत्रों के दौरे के दौरान भी मानवेंद्र सिंह उनके साथ नजर नहीं आए. जबकि, इस दौरान मंत्री हरीश चौधरी गहलोत के साथ बने हुए थे.

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गहलोत के इस दौरे के दौरान सभी पार्टी नेताओं के बीच मानवेंद्र सिंह की गैर मौजूदगी ने सियासी हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. साथ ही अब उनको लेकर कई तरह के कयास भी लगाए जाने लगे हैं. हालांकि, मानवेंद्र सिंह ने परिवार के साथ उदयपुर में एक निजी कार्यक्रम में होने के चलते गहलोत के साथ दौरे पर नहीं रहने ही बात कही है। लेकिन, उनके इस बयान के बाद भी सियासी पारा लगातार चढ़ा हुआ है। जिसके बीच अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस से नाराज चल रहे मानवेंद्र सिंह चुनाव से पहले फिर पुराने घर में नजर आ सकते है. जानकारों का कहना है कि भाजपा की ओर से जिस तरह से चुनाव से पहले पुराने चेहरों को फिर से घर में शामिल करने को लेकर कवायद चल रही है. उसके तहत मानवेंद्र सिंह को भी पार्टी में वापस शामिल करने को लेकर प्रस्ताव दिए जा सकते हैं. हालांकि, इस प्रस्ताव पर मानवेंद्र सिंह का रुख ही सबकुछ निर्भर होगा. ऐसे में बदले अब एक बार फिर सभी की निगाहें मानवेंद्र सिंह पर टिक गई है.


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