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उत्तराखंड में बारिश का तांडव, देहरादून हुआ जलमग्न, 24 घंटे में 6 मौतें

देहरादून। उत्तराखंड में जिसका डर मौसम विभाग पिछले दो दिनों से जता रहा था आखिरकार वही हुआ। उत्तराखंड में हो रही जबरदस्त बारिश के बाद राज्य में हालात काफी खराब हो गए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन के चलते 6 लोगों की मौत हो गई है। कई जगह रास्ते बंद हैं। इस कारण बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा भी पूरी तरीके से रुकी हुई है।

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उत्तराखंड में बारिश से हाहाकार।


उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पर असर पड़ा है। राज्य के कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है। लगातार पड़ रही बारिश से उत्तराखंड बेहाल हो गया है। पहाड़ों से उतर का पानी नीचे इलाके में इस कदर रौद्र रूप धारण कर रहा है कि नदियां नाले तो छोड़िए सड़कें भी नदियों में तब्दील हो गई हैं।

सरकार ने एहतियातन पहले ही चार धाम यात्रा को रोक दिया है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि 12 और 13 को प्रदेश में ऐसे ही बारिश बनी रहेगी। ऐसे में तमाम स्कूलों को बंद करने के आदेश सरकार ने पहले ही जारी कर दिए हैं।

रुद्रप्रयाग
भूस्खलन के चलते बदरीनाथ हाई-वे घोलतीर में पिछले 3 घंटों से बंद। हाईवे पर फंसे कई यात्री और वाहन। बीआरओ हाईवे खोलने में जुटा। पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण हो रही दिक्कतें। केदारनाथ हाईवे सोनप्रयाग के पास मुनकटिया पहाड़ी से मलबा आने के कारण बंद। NH मार्ग खोलने में जुटा।वहीं, सोनप्रयाग में अभी भी यात्री मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। कल से केदारनाथ यात्रा बंद है। सोनप्रयाग में लगभग 500 तीर्थयात्री फंसे हैं।


अगर कुछ और समय तक बारिश यूं ही पड़ती रही तो सबसे बुरा हाल हरिद्वार, रुड़की, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और देवबंद में होने वाला है क्योंकि गंगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, गौला नदी, सरयू तमाम नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं और कुछ खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं।

हरिद्वार
हरिद्वार में तो हालात यह हो गए हैं कि मंगलवार रात को ही गंगा खतरे के निशान से ऊपर चली गई। जिसके बाद सिंचाई विभाग और हरिद्वार जिलाधिकारी ने गंगा किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कह दिया था। खतरा इस बात से है कि लगातार बारिश के कारण नदियों का पानी अब आबादी की तरह रुख़ करने लगा है।

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भारी बारिश के कारण हरिद्वार के लक्सर में गंगा किनारे बने पुश्ते ढहने लगे हैं। नदी में इतना पानी आ गया है कि वह किनारों को तोड़कर गांव में घुसने के लिए आमादा हो चला है। हालांकि, हरिद्वार-ऋषिकेश और निचले तमाम इलाकों में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है ताकि कोई इस तरह की घटना होने पर फ़ौरन लोगों को रेस्क्यू किया जाए।

गंगा का जलस्तर अलर्ट लेवल से आगे निकल गया है। गंगा का जलस्तर 293.35 पहुंचा गया है जो खतरे के निशाम से कुछ ही नीचे है। डीएम ने तमाम बाढ़ चौकियों को अलर्ट रहने का निर्देश दे दिया है।

देहरादून
बरसात के मौसम में अमूमन देहरादून का भी हाल खस्ता हो जाता है। देहरादून की तमाम नदियां और नाले उफान पर आ गए हैं। बिंदाल नदी ने तो रात से ही लोगों को डराना शुरू कर दिया था जिसके बाद प्रशासन ने ऐसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया जो उस नदी की चपेट में आ सकते थे।

देहरादून में सड़कें सरकारी तालाब बन चुकी हैं। सड़कों पर पानी इतना बह रहा है कि कोई यह सोच भी नहीं सकता कि यह नदी है या सड़कें। देहरादून में है यह हाल होने के बाद सड़कों पर लगा लंबा जाम लगा हुआ है गाड़ियां रेंग-रेंगकर चल रही हैं। देहरादून के करीबन 50 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।



देहरादून में विभिन्न स्थानों पर हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी नाले उफान पर आ गए हैं। जिसमें ऋषिकेश क्षेत्र में चंद्रभागा नदी, थाना डालनवाला/नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में रिस्पना नदी और थाना प्रेमनगर/ सहसपुर क्षेत्र में आसन नदी का जलस्तर बढ़ गया है। जिससे आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को पुलिस प्रशासन द्वारा अलर्ट जारी कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए बताया गया है।

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सभी क्षेत्रों में पुलिस बल तथा आपदा प्रबंधन की टीमों द्वारा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पोजीशन में रहने को बताया गया है। पुलिस/प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त थाना क्लेमेनटाउन क्षेत्र में आशारोड़ी और डॉटकाली के बीच मलवा आ जाने के कारण दोनों तरफ सड़क पर जाम की स्थिति बनी हुई है।

थाना नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में 06 नंबर पुलिया में जलभराव के कारण जाम की स्थिति बनी हुई है। पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में बाइपास के पास सृष्टि बिहार में घरों में पानी घुसने की सूचना प्राप्त हुई है।

मसूरी
मसूरी में देर रात से हो रही तेज बारिश से कई भवन और मकान भूस्खलन की जद में आ गए हैं। मसूरी-धनोल्टी मार्ग भूस्खलन के बाद बंद हो गया है। मसूरी कैम्पटी से यमुनोत्री जाने वाले मार्ग पर कई क्षेत्रों में भूस्खलन हुआ है। वाहनों की आवाजाही में खासी दिक्कतें आ रही हैं।



वहीं, भारी बारिश के चलते स्कूल ना बंद किये जाने का जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए तत्काल स्कूल बंद करने के निर्देश दिये हैं। शिक्षकों को बच्चों को बारिश बंद होने के बाद सुरक्षित तरीके से घर भेजने को कहा गया है।

टिहरी
वहीं, टिहरी जिले में मंगलवार रात से हो रही लगातार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। टिहरी-ऋषिकेश-चम्बा के बीच फकोट और जाजल के पास के पास मलबा आने से रास्ता बंद हो गया है। एक ट्रक मलबे में फंस गया है।

ऋषिकेश से चम्बा के बीच बमुण्डा गदेरे में भारी मात्रा में पानी के आने से गाड़ियां और कांवड़ियां यात्री आर-पार नहीं जा पा रहे हैं। लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब बारिश कम हो और जेसीबी से गदेरे का मलबा हटाया जाये।



ऋषिकेश से चम्बा के जाजल फकोट बमुण्डा आगराखाल के बीच कई जगहों पर मलबा आने से सड़कें बंद हो गई हैं। घनसाली से घुत्तू मार्ग भी बंद है। जिला प्रशासन की तरफ से सड़क खोलने के लिये मोके पर जेसीबी लगाये गये हैं और कर्मचारी तैनात किये हुये हैं।

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साथ ही टिहरी झील का जलस्तर 765.50 आर एल मीटर हो गया है और तेज बारिश के कारण टिहरी झील के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। देवप्रयाग के मोलयगाव में भी सड़क बंद है।

चमोली
पहाड़ों में हालात किस तरह बेकाबू हैं उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चमोली में भारी बारिश से एक गाड़ी में मलबा घुस गया। हापला, गोपेश्वर, उडामाण्डा, रौता सहित एक दर्जन सम्पर्क मोटर मार्ग मलबा आने से बाधित हो गए हैं।



अल्मोड़ा
अल्मोड़ा जिले में मूसलाधार बारिस से जनजीवन बेहद प्रभावित हो गया है। नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। अल्मोड़ा-सेराघाट मोटर मार्ग व अल्मोड़ा-घाट मोटर मार्ग बंद हो गया है। 4 ग्रामीण सड़कें भी बंद हो गई हैं। कोसी बैराज क्षेत्र में 1132 मीटर पहुंचा नदी का जलस्तर, अल्मोड़ा में 58 एनएच, रानीखेत में 52, द्वाराहाट में 75 एनएच, सोमेश्वर में 63 और चौखुटिया में 34 एमएम बारिश हुई।

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नैनीताल
देर रात से हल्द्वानी, लालकुआं, नैनीताल के आस-पास के क्षेत्रों में मूसलाधार वर्षा जारी है। शहरी और ग्रामीण इलाकों में कई जगह जलभराव हुआ है। इसके अलावा गौला और नंधौर नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गौला नदी के उफान में होने के चलते लालकुआं से शांतिपुर तक जगह-जगह नदी किसानों की जमीनों को कटाव कर रही है। नदी किनारे रह रहे लोग नदी के उफान देखकर दहशत में हैं।



उधर, काठगोदाम के ब्यौराखाम गाव में भूस्खलन होने से 5 घरों में मलबा आ गया है जबकि जिले के कई आंतरिक मार्ग बंद हो गए है, जिसको जिला प्रशासन खुलवाने में लगा है।

पिथौरागढ़
ज़िले में बारिश ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। बारिश के चलते लगातार हो रहे भूस्खलन से नेशनल हाइवे संख्या 9 जहां लगातार बाधित हो रही है वहीं ज़िले के 1 दर्जन सड़क मार्ग अब भी बंद पड़े हैं। जिससे कई गांवों का सम्पर्क जिला और तहसील मुख्यालय से कट गया है।



मानसून आने के बाद भूस्खलन की चपेट में आने से ज़िले में अब तक 6 लोगों की मौत हुई है जबकि 5 लोग घायल हुए है। इतना ही नहीं बारिश के चलते ज़िले में अब तक 50 रिहायशी मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, चेतावनी को देखते हुए ज़िले का आपदा कंट्रोल रूम 24 घंटे काम में जुटा है।

प्रदेश का हाल बेहाल
देहरादून-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग बारिश के कारण बाधित है। गढ़वाल में कर्णप्रयाग- ग्वालदम और धरासू-यमुनोत्री मार्ग पूरी तरीके से बंद है। ऋषिकेश-टिहरी रोड भी मलबा आने के कारण बंद है। ऋषिकेश-हरिद्वार मार्ग पर भी पानी भरने से यातायात पूरी तरीके से प्रभावित हो रहा है। हरिद्वार बाइपास रोड पर जलभराव होने से यात्री लंबी जाम में फंसे हैं। वहीं, पानी के तेज़ बहाव में कई लोग गाड़ियों से नीचे तक गिर गए हैं।

उत्तरकाशी-श्रीनगर रोड भी मलबा आने के कारण कई जगह बंद है। राज्य की चार धाम यात्रा भारी बारिश के कारण रोक दी गई है।

फिलहाल प्रदेश में बरसात रुकने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मौसम विभाग पल-पल की स्थिति पर नज़र बनाए हुए है। सरकार की तरफ से देहरादून, हल्द्वानी, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में लोगों की सहायता के लिए हेल्प सेंटर बनाए गए हैं जहां से बारिश की पल-पल की ख़बरों के साथ-साथ दुर्घटनाओं और रोड बंद होने की घटनाओं पर नज़र रखी जा रही है।

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