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झील के बीचों-बीच फिर दिखाई दी 200 साल पुरानी वो याद, जहां कभी था राजमहल

टिहरी। डैम का जलस्तर कम होने से जलाशय में डूबा पुरानी टिहरी का राजमहल एक बार फिर दिखने लगा है। लोगों की भीड़ जुट गई है। पुरानी यादें ताजा हो रही हैं और एक बार फिर आंखें नम होने लगी हैं। लोग बताते हैं कि 1815 में इस सुंदर शहर के बनने के वक्त राजा सुदर्शन शाह को आगाह किया गया था कि इस शहर की अल्पआयु है।

टिहरी झील के बीचों-बीच दिखाई देने लगा है राजमहल।


जलस्तर कम होने के बाद एक बार फिर टिहरी झील के आस-पास लोगों की काफी भीड़ होने लगी है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग और युवा इस झील के बीचों-बीच राजमहल के खंडहर को देखकर पुरानी यादें ताजा कर रहे हैं। दरअसल, 2006 से टिहरी बांध का जलस्तर साल में कुछ वक्त के लिए कम होने से जलमग्न राजमहल और रानी दरबार के कुछ हिस्से दिखते हैं।


यादों और इतिहास के पन्नों में ही सिमट चुकी पुरानी टिहरी के बाशिंदे (जो अब देहरादून और नई टिहरी बस चुके हैं) अपने बच्चों को यहां लाते हैं और टिहरी के इतिहास से रूबरू कराते हैं। गढ़वाली लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीत 'टिहरी डूबणु लग्यूं चा भैजी' को याद करते हैं और कुछ देर रुककर वापस चले जाते हैं।

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बुजुर्ग पुरानी टिहरी को याद करते हुए कहते हैं कि पुरानी टिहरी स्वर्ग से कम नहीं थी। इसलिए इसे त्रिहरी भी कहते थे। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस जगह पर त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश स्नान करने आते हैं।


टिहरी झील के बीचों-बीच राजमहल।

त्रिहरी से टिहरी बनने का सफर
झील के बीचों-बीच एक टापू की तरह दिख रहे इस राजमहल की खासियत ये है कि 2006 से यह महल कई बार टिहरी झील का जलस्तर कम होने पर दिखता है। फिर झील भरने पर पानी के अन्दर डूब जाता है। लेकिन, राजमहल जस का तस है। पुरानी टिहरी शहर तीन नदियों भागीरथी, भिलंगना और घृत गंगा (विलुप्त हो चुकी) से घिरा हुआ था, इसलिए इस शहर को त्रिहरी नाम से पुकारते थे। बाद में ये शहर टिहरी नाम से जाना जाने लगा।

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राजा सुदर्शन शाह की तस्वीर।

इस शहर को राजा सुर्दशन शाह ने 28 दिसम्बर 1815 में बसाया था। लेकिन, उस वक्त ज्योतिषियों ने राजा को चेताया कि इस शहर की अल्पआयु है। 1965 में टिहरी के तत्कालीन केन्द्रीय सिंचाई मंत्री केएल राव ने टिहरी डैम बनाने की घोषणा की और 29 जुलाई 2005 को टिहरी शहर झील में तब्दील हो गया। करीब सौ से ज्यादा परिवारों को शहर छोड़ना पड़ा। 29 अक्टूबर 2005 को टिहरी डैम की टनल बंद कर दी गई और टिहरी शहर डूब गया। 30 जुलाई 2006 में टिहरी डैम से बिजली का उत्पादन शुरू हुआ।

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