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शहीद की मां ने कहा- मुझे बेटे की शहादत पर गर्व है

शेखपुरा। मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ, मुझे अपने बेटे की कुर्बानी पर गर्व है....ये कहते-कहते एक पिता की आंखों के आंसू बहने लगते है। पास में बैठी मां अपनी साड़ी से अपने आंसू छुपाने लगती है।

शहीद के अंतिम संस्कार का विजुअल।

ये दर्द...ये आंसू है, उस मां-बाप के जिनका बेटा जम्मू कश्मीर में पिछले दिनों शहीद हो गया। शहीद अंकित राजकुमार उर्फ सीटू कुमार 28 नवम्बर को अपने घर एकाढा गांव छुट्टियों में आया था। पहली जनवरी को उसने लेह पहुंचकर ड्यूटी ज्वॉइन की थी। लेकिन चार दिन बाद की घरवालों को उसकी शहादत की खबर मिली।



घरवालों ने बताया कि शुक्रवार शाम लद्दाख से फोन आया था कि अंकित राजकुमार उर्फ सीटू कुमार शहीद हो गए। ये खबर फोन पर शहीद राजकुमार के बड़े भाई कुणाल गौरव को दी गई, जो दिल्ली में रहते है। इस खबर को सुन पहले तो कुणाल को यकीन नहीं हुआ, फिर कुणाल ने खुद को संभाला और ये खबर अपने मां-पिता को दी।

तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जब शेखपुरा पहुंचा
बेटे के शहीद होने की खबर एकाढा गांव में मिलने के बाद पूरे गांव में मातमी सन्नाटा छा गया। मां, इस खबर को सुन बेसुध हो गई। पिता अमरिंदर सिंह को इस खबर पर यकीन नहीं हो रहा था, कि एक हफ्ते पहले ही तो उनका बेटा घर से गया था और ड्यूटी ज्वॉइन की थी। शहीद जवान राजकुमार का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जब शेखपुरा लाया गया, तो माहौल गमगीन हो गया, परिजन देखते ही रोने बिलखने लगे। दो दिनों बीत गए, जब अंतिम संस्कार गांव के समीप पुश्तैनी जमीन में किया गया था। इस दौरान शहीद जवान के सम्मान में सेना के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर उन्हें विदाई दी। हर तरफ वीर जवान अंकित राजकुमार अमर रहे के नारे गूंजते रहे।

'सोचा था...इस बार बेटा आएगा तो उसकी शादी कर देंगे'
24 वर्षीय शहीद राजकुमार के घरवाले ही शादी कर उनका घर बसाने का सपना देख रहे थे। घरवाले लड़की देख रहे थे। तैयारी जोर-शोर से चल रही थी, कि इस बार बेटा आएगा तो उसकी शादी कर देंगे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था और नये साल में शादी के जश्न की जगह बेटे की शहादत की खबर आई।

लद्दाख में बिहार का जवान शहीद
शेखपुरा जिले चेवाड़ा थाना क्षेत्र के एकाढा गांव के रहने वाले 24 वर्षीय सेना के जवान जवान राजकुमार जम्मू कश्मीर के लदाख में भारी बर्फबारी के दौरान भूस्खलन में शहीद हो गये। राजकुमार सेक्टर 10 में तैनात थे। शहीद जवान एकाढा गांव निवासी किसान आमोद प्रसाद सिंह उर्फ मंटू सिंह के बेटे थे।

साल 2012 में सेना ज्वॉइन किया था

करीब पांच साल पूर्व राजकुमार सेना में शामिल हुए थे। पहली ट्रेनिंग बेंगलुरु में हुई। इसके बाद तीन साल तक अमृतसर में सेवा दी। 2017 में जम्मू कश्मीर में पोस्टिंग मिली। इसी दौरान लद्दाख में चट्टान खिसकने के दौरान हुए हादसे में उनकी शहादत हो गई।


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