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GTB अस्पताल बाहरी लोगों का इलाज करेगा या नहीं? जल्द आएगा बड़ा फैसला

नई दिल्ली: जीटीबी अस्पताल में दिल्ली से बाहर के लोगों का इलाज नहीं करने संबंधी आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट 12 अक्टूबर को फैसला सुनाएगा. पिछले 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

डिजाइन फोटो.


दिल्ली सरकार की तरफ से वकील राहुल मेहरा, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से वकील अशोक अग्रवाल ने दलीले रखीं थीं. राहुल मेहरा ने कहा था कि दिल्ली की आबादी करीब दो करोड़ है. पिछले दो सालों से ये डॉक्टरों के साथ मारपीट की शिकायतें मिल रही हैं. इसकी वजह है बढ़ती भीड़. इसीलिए ये व्यवस्था लागू की गई.
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अस्पताल में 20 फीसदी बेड बाहर वालों के लिए रिजर्व
उन्होंने कहा था कि दिल्ली के बाहरवालों के लिए अभी भी बहुत से टेस्ट हो रहे हैं. किसी मरीज को इलाज के लिए मना नहीं किया जा रहा है. सभी आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है. अस्पताल में 20 फीसदी बेड बाहर वालों के लिए रिजर्व है. तब चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि तब आपको ये सर्कुलर निकालने की जरुरत क्यों पड़ी. स्वास्थ्य सबके लिए बराबर है. तब दिल्ली सरकार ने कहा था कि हम केंद्र सरकार नहीं हैं, दूसरे राज्य भी तो काम करें. हर राज्य की अपनी सीमा है, हमारे सरकारी अस्पताल भी निजी की तरह लगने चाहिए. आखिर एम्स भी तो इलाज के पैसे लेता है.
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दिल्ली सरकार ने सर्कुलर जारी किया
कोर्ट ने कहा था कि हम आपके जवाब को संविधान की धारा 14 और 21 की कसौटी पर परखेंगे. याचिकाकर्ता के वकील अशोक अग्रवाल ने कहा था कि दिल्ली सरकार का ये फैसला संविधान की धारा 14 और 21 के साथ-साथ मानवता के भी खिलाफ है. याचिका सोशल जूरिस्ट नामक एनजीओ ने दायर किया है. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने पिछले 1 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी कर दिल्ली के बाहर के लोगों का इलाज नहीं करने का आदेश जारी किया है. याचिका में इसे असंवैधानिक बताया गया है. जीटीबी अस्पताल एक हजार बेड का अस्पताल है और यह यूपी की सीमा से सटा हुआ है.
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दिल्ली का निवासी होने का प्रमाण पत्र होगा
आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि आपातकालीन स्थिति में किसी भी मरीज को चिकित्सा मुहैया कराने से मना नहीं किया जाएगा. आदेश के मुताबिक ओपीडी के जरिए सभी मरीज डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं लेकिन दवाईयां उन्हें ही मिलेंगी, जिनके पास दिल्ली का निवासी होने का प्रमाण पत्र होगा. दिल्ली सरकार ने ये कदम जीटीबी अस्पताल में भीड़ को कम करने के लिए उठाया है. दिल्ली सरकार के इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है.

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