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लैंसडाउन: एक जगह जो बनाएगी आपके हनीमून को यादगार

हनीमून के लिए शिमला, मनाली और कसौली जैसे हिल स्टेशन काफी फेमस हैं, लेकिन लैंसडाउन के आकर्षण से किसी की तुलना नहीं की जा सकती। जी हां, भीड़ से दूर यह जगह आपको नजारों की भरमार देंगे साथ ही आपके रोमांटिक मूड को बनाएंगे और भी रोमांटिक। हरी वादियां और पक्षियों का कोलाहल आपको यहां के मौसम का दीवाना बना देगा।


यहां से जाने के बाद भी यह हमारे मन में बसा रह जाता है। लैंसडाउन का इतिहास 1880 के दशक का है जब प्रभु लैंसडाउन यहां पहुंचे। यह शहर गढ़वाल राइफल्स के सैन्य रेजिमेंट द्वारा संरक्षित था। इसकी प्राचीनता और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए उन्हें श्रेय दिया जा सकता है। यहां की स्वच्छता इस हिल स्टेशन को अन्य हिल स्टेशनों से अलग करती है।



यहां आपको रंगीन यादगार वस्तुओं की छोटी-छोटी दुकानें और आरामदायक कैफे मिलेंगे। इसके अलावा आप यहां चर्च ऑफ सेंट मैरी और भुल्ला ताल का भी आनंद ले सकते हैं।

लैंसडाउन की एक बड़ी विशेषता यहां के ट्रेवलर्स के लिए यहां का सौहार्दपूर्ण आतिथ्य सत्कार है। यहां के लोग आपके प्रति इतना स्नेह दिखाएंगे कि आपको लगेगा ही नहीं की आप बाहर से आए हैं।

क्या है लैंसडाउन के आस पास-

मंदिर और आश्रम- लैंसडाउन में सैर स्पाटे के लिए कई पर्यटक स्थल है। कंवाश्रम, जो मंदिरों के शहर पुरी का प्रवेश द्वार माना जाता है, लैंसडाउन का प्रसिद्ध आश्रम है। लैंसडाउन के हरे भरे जंगलों के बीच बने इस आश्रम के पास मालिनी नदी बहती है। किंवदंती है कि इसी स्थान पर महाऋषि विश्वामित्र ने तपस्या की थी। इसके अलावा, हिन्दू भगवान शिव को अर्पित तारकेश्वर महादेव मंदिर, यहां का पवित्र धार्मिक स्थान है। समुन्दरी तट से 2092 मीटर ऊँचाई पर स्थित, पहाड की चोटी पर बने इस मंदिर के दर्शन करने हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं।

गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल युद्ध स्मारक और गढवाली मैस- ये दोनों यहां के लोकप्रिय पर्यटक स्थल है, जिन्होंने लैंसडाउन के विख्यात पर्यटक स्थलों में अपना नाम दर्ज किया है। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल युद्ध स्मारक का निर्माण 11 नवंबर 1923 में, भारत के पूर्व कमांडर इन चीफ, ट्रेंट के लोर्ड लोरींस्न ने किया था। 1888 में, अंग्रेजों द्वारा बनाई गई गढ़वाली मैस लैंसडाउन की प्राचीन इमारत है। जो आज, एशिया के प्रमुख संग्रहालयों में संघटित है।

बूल्ला तालाब- यह तालाब गढ़वाल राइफल्स के योद्धाओं को समर्पित, अप्राकृतिक सुन्दर झील, लैंसडाउन का आकर्षक स्थल है। इस झील का नाम गढ़वाली शब्द “बूल्ला” पर रखा गया है, जिसका अर्थ है “छोटा भाई”। सैलानी इस झील में नौका विहार और पैडलिंग का आनंद ले सकते हैं। तालाब को और सुन्दर बनाने के लिए यहाँ बच्चों के लिए पार्क, खूबसूरत फव्वारे और बांस के मचान लगाए गए हैं।

सेंट मैरी चर्च- 1895 में, रॉयल इंजीनियर्स के ए.हेच.बी ह्यूम द्वारा बनाई गई सेंट मैरी चर्च, लैंसडाउन की सुन्दर चर्चों में से एक है। 1947 में, खंडित हुई इस चर्च को गढवाल रेजिमेंटल राइफल्स सेंटर ने फिर दोबारा स्थापित कर, इसका प्रयोग स्वतंत्रता पूर्व भारतीय चित्रों के प्रदर्शन के लिए किया। रेजिमेंटल संग्रहालय, दुर्गा देवी मंदिर, सेंट जॉन चर्च, हवाघर और टिप–इन–टॉप लैंसडाउन के अन्य श्रेष्ठ आकर्षक स्थल है।

जंगल सफारी- ऐडवेन्चर प्रेमी चाहे, तो इस क्षेत्र में ट्रैकिंग और जंगल सफारी का भी मजा ले सकते हैं। इस क्षेत्र का सबसे बढ़िया ट्रैकिंग रुट लवर्स लेन, ट्रैकिंग के कई विकल्प प्रदान करता है। विभिन्न प्रजातियों के वनस्पति और प्राणी समूहों से परिपूर्ण इस क्षेत्र के हरे भरे जंगलों में, सैलानी चाहे तो एक छोटी सी पैदल यात्रा पर जा सकते हैं। यहां कई टूर ऑपरेटर वाजिब दाम में जंगल सफारी और ट्रैकिंग का आयोजन करते हैं।



लैंसडाउन जाने का सबसे अच्छा समय
मार्च से लेकर नवंबर महीने के बीच, यहां का वातावरण बहुत मधुर और सुहावना बन जाता है, जो इस स्थान को देखने का बढिया समय साबित होगा।

कैसे पहुंचना है
अच्छा रहेगा कि आप दिल्ली से मेरठ की ओर जाएं और फिर लैंसडाउन के लिए NH 119 की राह पकड़ें। यहां से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन कोटद्वार है जहां से आप हिलस्टेशन के लिए टैक्सी ले सकते हैं।



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