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नर्मदा परिक्रमा से रखी परिवर्तन की नींव और सत्ता गंवाने के 15 साल बाद कराई वापसी

भोपाल। साल 2018 अस्ताचल हो चला है, ये साल जाते-जाते कांग्रेस का 15 साल पुराना घाव भर गया, जबकि बीजेपी को गहरा जख्म दे गया. बदलाव के बाद कांग्रेस नए जोश से लबरेज है और आगामी चुनाव के लिए अपनी शर्तों पर सहयोगियों को साथ जोड़ रही है.

दिग्विजय सिंह.


दरअसल, मध्यप्रदेश में बदलाव की नींव सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नर्मदा परिक्रमा के जरिए रखी थी और आसमान की ओर देख रही बीजेपी को उन्होंने जमीन पर चलकर जमीन दिखाया था. परिक्रमा के जरिए उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की नर्मदा सेवा यात्रा के प्रभाव को नेस्त-नाबूद कर दिया था और पर्दे के पीछे रहकर राजनीति के चाणक्य रणनीति बनाते रहे और बीजेपी इस गफलत में रही कि कांग्रेस में अंदरखाने कुछ ठीक नहीं है, बस यहीं बीजेपी मात खा गयी.

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ऐसा माना जाता है कि 1993 से 2003 तक मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह की वजह से मध्यप्रदेश कांग्रेस को 15 साल का वनवास काटना पड़ा क्योंकि 10 साल के उनके कार्यकाल में जर्जर सड़क, ढिबरी का उजाला और पानी की किल्लत को बीजेपी ने हथियार बनाया और सालों से जमी कांग्रेस को उखाड़ फेंका और विकास नहीं प्रबंधन के दम पर चुनाव जीतने का दम भरने वाले दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री से पूर्व मुख्यमंत्री बन गये.
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हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी आसमान की ओर देखती रही और कांग्रेस जमीन पर काम करती रही, लेकिन सबसे खास रणनीति कांग्रेस की जो रही वो ये कि कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को पर्दे के पीछे कर सियासी लड़ाई को सिंधिया बनाम शिवराज कर दिया क्योंकि दिग्विजय के पीछे होने से बीजेपी को हमला करने का मौका नहीं मिला और सिंधिया पर हमला करके खुद ही घिर जाती थी क्योंकि राजमाता विजयाराजे सिंधिया खुद बीजेपी की संस्थापक सदस्य रहीं थी.
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इसके अलावा कांग्रेस की एक और रणनीति रही, जिसके तहत कमलनाथ को प्रदेश की कमान सौंपी गयी थी क्योंकि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की पुरानी अदावत जग जाहिर है. ऐसे में कमलनाथ ही एक मात्र ऐसे नेता थे जो खेमे में बंटी कांग्रेस को एक मंच पर ला सकते थे, भले ही कांग्रेसी दिग्गजों का अपने-अपने क्षेत्र में खासा प्रभाव है, लेकिन पूरे प्रदेश में सिर्फ दिग्विजय सिंह का ही जनाधार है. जिसका फायदा भी कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष बनने से पार्टी को मिला और चुनाव परिणाम के बाद कमलनाथ को सीएम बनाने के लिए दिग्गी राजा ने उनके पक्ष में खूब फील्डिंग की. 10 जनपथ से ऐसी ही फील्डिंग 1993 में दिग्विजय सिंह के पक्ष में कमलनाथ ने भी की थी.


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