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सिलिकोसिस पर सरकार की अजीब योजना, जिंदा रहने पर 2 लाख, मरने पर 3 लाख

पाली. जिले में सिलिकोसिस से मरने वाले मरीजों की संख्या में लगाता इजाफा हो रहा है. अब तक 351 सिलिकोसिस के मरीज सामने आ चुके हैं, जिनमें 59 से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है. हालांकि दिलचस्प बात ये है कि जिन मजदूरों के घर में मरीज की मौत होती है उसके चेहरे पर कोई सिकन नहीं होती है.

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गरीब की मजबूरी ऐसी होती है कि उसकी मौत की सूचना भी बुरी नहीं लगती. जब उसे पता चले की उसकी मौत होने के बाद उसके परिवार को सरकार आर्थिक सहायतता देगी तो, शायद वो मौत की खबरी उस गरीब को सुकून देती है. पाली में लगातार सिलिकोसिस मरीजों की संख्या में वृद्धी हो रही है. ये ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज की मौत किसी भी समय हो सकती है.
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सरकार की ओर से इस बीमारी से पीड़ित श्रमिक को जीवत रहते 2 लाख और उसके मरने के बाद उसके आश्रितों को 3 लाख रूपए की सहायता राशी दी जाती है. इस सहायता राशी के मिलने की उम्मीद के चलते जिन मजदूरों को बीमारी का प्रमाण पत्र दिया जाता है, उनके चहरे पर भी मायूसी नजर नहीं आती.

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पाली का ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित
पाली में सबसे ज्यादा सिलिकोसिस के मरीजे बाली के नाणा बेड़ा और रायपुर के कई गांवों में सामने आए हैं. यहां के लोग कच्चे पत्थर को तोड़ने और घसाई का कार्य करते हैं. लगातार पत्थर की धूल और बिना सुरक्षा के कार्य करने के कारण इनके फेफड़ों में धूल के कण जम जाते हैं. जिसकी वजह से इन्हें सिलिकोसिस की बीमारी हो जाती है.

सिलिकोसिस मरीजों की जांच करने वाले डॉक्टरों को मरीज बताते हैं कि वो प्रतिदिन मजदूरी भुगतान पर कार्य करते हैं. 300 से 500 रूपए तक उनकी मजदूरी होती है. लेकिन, घर की जीम्मेदारी में वो पैसा कम पड़ता है. ऐसे में उनकी मौत के बाद उनके परिवार को 3 लाख रूपए एक साथ मिलते हैं तो वो पैसा उनके परिवार की काफी मदद कर सकता है.


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