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'नक्सलगढ़' के इस गांव में पहली बार पैदल पहुंचा कोई कलेक्टर, देखें वीडियो

रायपुर/नारायणपुर। नक्सलियों का गढ़ कहे जाने वाले नारायणपुर में छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार किसी कलेक्टर ने वहां जाने की हिम्मत दिखाई है। अंजरेल की तराई में बसे गांव के लोगों का हाल जानने कलेक्टर ने जंगल, पहाड़ का तीन किमी सफर पैदल तय किया। गांव में 21 परिवार रहते हैं, जिनसे मिलने कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा पहुंचे।

अंजरेल गांव के लिए पैदल जाते कलेक्टर।


अंजरेल पहाड़ी के तराई में बसे गांव के ग्रामीणों से उनके सुख-सुविधा का हाल-चाल पूछने कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने अंजरेल की लगभग 3 किलोमीटर लंबी पहाड़ी पैदल हाथ में लाठी लेकर चढ़ाई की। प्रदेश के इतिहास में संभवतः पहला अवसर है, जब कोई कलेक्टर हाथ में लाठी लेकर लगभग पौने दो घंटे पैदल चलकर इन इक्कीस परिवारों से मिलने और उनकी समस्याओं के बारे में जानने के लिए इतना आतुर दिखायी दिया हो।


जंगल का रास्ता तय करते कलेक्टर और उनकी टीम

कलेक्टर ने जांची खाने की क्वालिटी
उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर हालातों का जायजा लिया। कलेकटर ने केंद्र में बच्चों को परोसे जाने वालो भोजन की क्वालिटी भी जांची। बच्चों को देख कलेक्टर उनके साथ घुलमिल गए, उन्होंने नन्हें-मुन्हें बच्चों से भी स्नेहपूर्वक बातचीत की और उन्हें बिस्कुट भी खिलाये।

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कलेक्टर को देख लोगों ने बताई समस्याएं
नक्सल प्रभावित होने के कारण कोई भी अधिकारी और कलेक्टर यहां लोगों का हाल-चाल जानने नहीं आए। कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने अपनी टीम के साथ मुख्यालय से 20 किमी दूर ऊंची पहाड़ियों के बीच बसे अंजरेल गांव पौने दो घंटे में तीन किमी पैदल चलकर पहुंचे। उन्हें देख गांव वालों ने समस्याओं का पिटारा खोल दिया।

स्कूल शुरू करने लगाई गुहार
ग्रामीणों ने कलेक्टर से खड़कागांव से अंजरेल तक सड़क बनाने के साथ ही बच्चों के लिए स्कूल शुरू करने की गुहार लगाई है। यहां संचालित स्कूल में शिक्षकों के नहीं पहुंचने के कारण शिक्षा विभाग ने इसे खड़कागांव शिफ्ट कर दिया है। इससे 120 परिवार में रहने वाले स्कूली बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो गए हैं। कलेक्टर ने नए सत्र से गांव में ही स्कूल संचालित करने का आश्वासन दिया है।

पंचायत सचिवों का कटेगा वेतन
जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में लोक सुराज अभियान की मॉनिटरिंग के लिए निकले कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने भ्रमण के दौरान कई गांवों में सरकारी योजनाओं का मुआयना किया। कलेक्टर नक्सल प्रभावित इलाके के गांव करमरी पहुंचे जहां उन्हें कोई अधिकारी-कर्मचारी नहीं मिला। वहां स्कूल भी बंद मिला। बावड़ी में भी कोई आवेदन लेने वाला कर्मचारी नहीं मिला। उन्होंने एसडीएम को दोनों गांव के पंचायत सचिवों और शिक्षक का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए।


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