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इस कुएं में स्नान करने से मिलती है असाध्य रोगों से मुक्ति

चित्रकूट। जिले में मकर संक्रांति का अलग ही महत्व है। यहां मकर संक्रांति के अवसर पर प्रभु श्री राम की तपोस्थली चित्रकूट में भी श्रद्धालुओं की भीड़ स्नान दान के लिए उमड़ी है। रामघाट से लेकर मंदाकिनी पुल घाट तक स्नानार्थियों की भीड़ पुण्य की डुबकी लगाने की लिए आतुर है।

मकर संक्रांति के दिन कुएं में नहाने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।


भरतकूप क्षेत्र में पौराणिक मान्यताओं और श्री रामचरितमानस सहित कई धार्मिक ग्रंथों में इस स्थान का उल्लेख मिलता है। मान्यता है की भरतकूप में स्थित कुएं के जल से स्नान करने पर असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और सभी तीर्थों का फल प्राप्त होता है। धर्मनगरी में पांच दिन मकर संक्रांति की धूम भरतकूप में देखी जाती है। लाखों श्रद्धालु मकर संक्रांति में पहुंच कर कूप में स्नान कर पुण्य लाभ लेते हैं।


भरतकूप के कुएं का श्री रामचरित मानस में भी है वर्णित
यह वह स्थान है जहां पर स्नान से सारे तीर्थों का पुण्य मिलता है। वजह है कि इस कूप में भरत जी ने समस्त तीर्थ के जल को लाकर डाला था जो वह भगवान राम के राज्याभिषेक को लाए थे। भरतकूप मंदिर में एक कुआं है, जिसका धार्मिक महत्व गोस्वामी तुलसीदास ने श्री रामचरित मानस में वर्णित किया है। महंत दिव्य जीवनदास बताते हैं कि जब प्रभु राम चौदह साल का वनवास काटने के लिए चित्रकूट आए थे। उस समय उनके अनुज भरत को माता
कैकेयी के क्रियाकलाप कर काफी दुख हुआ था।


इसी कुएं में भरत ने भगवान राम के राज्याभिषेक की सामग्री को छोड़ दिया था।

राज्याभिषेक की सामग्री को कुएं में छोड़ गए थे भरत
भरत अयोध्या की जनता के साथ श्री राम को मनाने चित्रकूट आए थे। साथ में प्रभु का राज्याभिषेक करने को सारे तीर्थों का जल भी लाए थे, लेकिन भगवान राम चौदह साल वन रहने को दृढ़ प्रतिज्ञ थे। इस पर भरत जी काफी निराश हुए और जो जल और सामग्री श्री राम के राज्याभिषेक को लाए थे, उसको इसी कुएं में छोड़ दिया था और भगवान राम की खड़ाऊ लेकर लौट गए थे।

यहां पर बना भरतकूप मंदिर भी अत्यंत भव्य है। इस मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन की मूर्तियां है। सभी प्रतिमाएं धातु की है। वास्तुशिल्प के आधार पर मंदिर काफी प्राचीन है। माना जाता है कि बुंदेल शासकों के समय में मंदिर का निर्माण हुआ था।

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मोक्ष को प्राप्त करता है मनुष्य
वैष्णव धर्मावलंबियों की मान्यता है कि इस कूप में स्नान से समस्त तीर्थों का पुण्य तो मिलता ही है साथ की शरीर के असाध्य रोग भी दूर होते है। भगवान राम के चरणों के प्रताप से मनुष्य मृत्यु के पश्चात स्वर्गगामी होता है और मोक्ष को प्राप्त करता है।


भरतकूप में लगता है पांच दिन का मेला
भरतकूप में मकर संक्रांति को पांच दिन मेला लगता है। यहां पर बुंदेलखंड के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु हर दिन आते हैं और इस कुएं में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते है। हर अमावस्या पर भी यहां पर श्रद्धालु स्नान करने के बाद चित्रकूट जाते है और फिर मंदाकिनी में स्नान कर कामदगिरि की परिक्रमा लगाते हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर भरतकूप में पांच दिवसीय मेला भी लगता है। बुंदेलखंड के कई छोटे बड़े व्यापारी मेले में विभिन्न घरेलू वस्तुओं और सामग्रियों की दुकान सजाते हैं। सिस्टम की उदासीनता के चलते ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास अभी तक बाट जोह रहा है।



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