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अयोध्या : जहां से निकली रामराज्य की संकल्पना ने पूरी दुनिया को किया प्रेरित

अयोध्या। भारतीय संस्कृति और रामराज्य की संकल्पना जहां आकर साकार होती है। वह धर्म नगरी अयोध्या आज भी लोगों के लिए आदर्श बनी हुई है। जब-जब धर्म और शासन की बात आती है, तब-तब अयोध्या का नाम लिया जाता है। यहां हिन्दू-मुस्लिम, सिख-ईसाई अयोध्यावासी कहलाने पर गर्व महसूस करते हैं। 'कौशल देश' आज भी अपने राजा का धर्म निभा रहा है, जिससे पूरी दुनिया प्रेरित हुई है।

डिजाइन फोटो।


सरयू नदी के किनारे बसी अयोध्या नगरी अत्यन्त प्राचीन धार्मिक नगर है। प्राचीन काल में कौशल देश कहा जाता था। अयोध्या हिन्दुओं का प्राचीन और सात पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। यहां पर कुछ प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां आकर हमें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जहां आकर हमें एक सुख का अनुभव होता है। चारो तरफ से आती घंटियों की आवाज मधुर संगीत की तरह लगती है।

अयोध्या धाम में हैं कुछ विशेष मंदिर-


रामकोटः

यहां भारत और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का सालभर आना-जाना लगा रहता है। मार्च-अप्रैल में मनाया जाने वाला रामनवमी पर्व यहां बड़े जोश और धूमधाम से मनाया जाता है। शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थित रामकोट अयोध्या में पूजा का प्रमुख स्थान है।




हनुमान गढ़ीः
इस मंदिर में विराजमान हनुमान जी को वर्तमान में अयोध्या का राजा माना जाता है। यह माना जाता है कि हनुमान जी कलियुग में अपने भक्तों की रक्षा कर रहे हैं। यह भी कहा जाता है कि बजरंगबली यहां एक गुफा में रहते हैं और रामजन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते हैं। यहां ऐसा माना जाता है कि श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

नागेश्वर नाथ मंदिरः
माना जाता है कि कुश जब सरयू नदी में नहा रहे थे तो उनका बाजूबंद खो गया था। बाजूबंद एक नाग कन्या को मिला जिसे कुश से प्रेम हो गया। वह शिवभक्त थी। कुश ने उसके लिए यह मंदिर बनवाया। कहा जाता है कि यही एकमात्र मंदिर है जो विक्रमादित्य के काल के पहले से है। कहा जाता है कि नागेश्वर नाथ मंदिर को भगवान राम के पुत्र कुश ने बनवाया था।



कनक भवनः
यह मंदिर टीकमगढ़ की रानी ने बनवाया था। इस मंदिर के विग्रह भारत के सुंदरतम स्वरूप कहे जा सकते हैं। कनक भवन हनुमानगढ़ी से आगे चलने पर दाहिनी तरफ स्थित है। यह मंदिर सीता और राम के सोने के मुकुट पहने प्रतिमाओं के लिए लोकप्रिय है। इस मंदिर की सुरक्षा में पुलिसकर्मी लगे रहते हैं।

मणि पर्वतः
रामायण में इस बात का उल्‍लेख किया गया है कि जब भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्‍मण को मेघनाद ने युद्ध के दौरान घायल कर दिया था तो उनहे संजीवनी बूटी की जरूरत थी और हनुमान जी ने संजीवनी बूटी वाला पूरा पहाड़ ही उठाकर ले आए थे। किवंदतियों के अनुसार, पहाड़ का छोटा सा हिस्‍सा यहां गिर गया था। इस टीले को या पहाड़ी को मणि पर्वत के नाम से जाना जाता है।

इस पर्वत के पास में ही एक और टीला स्थित है, जिसे सुग्रीव पर्वत कहा जाता है। मणि पर्वत की ऊंचाई 65 फीट है। यह पर्वत कई मंदिरों का घर है। अगर आप पहाड़ी की चोटी पर खड़े होते है तो पूरे शहर और आसपास के क्षेत्रों का मनोरम दृश्‍य नजर आता है।



राम की पैड़ीः

राम की पैड़ी अयोध्‍या में नयाघाट है, जहां श्रद्धालु अयोध्‍या में सरयू नदी में स्‍नान करते हैं। इस घाट पर भारी संख्‍या में भक्‍त स्‍नान करने आते हैं और पवित्र नदी में पवित्र डुबकी लगाते है। यहां की वास्‍तविक सीढि़यां मूसलाधार बारिश में नदी के तेज बहाव में बह गई थीं। घाट के लिए पानी सरयू नदी से मोटर पंपों से खींचा जाता है।

दशरथ भवनः
दशरथ भवन अयोध्‍या के बीचो-बीच में स्थित है। यह माना जाता है कि इस भवन को ठीक उसी जगह बनाया गया है जहां राजा का असली निवास हुआ करता था। भगवान राम के पिता का अस्तित्‍व भी इसी स्‍थान से जुड़ा हुआ है। भगवान राम ने अपने भाइयों के साथ अपना बचपन इसी क्षेत्र में बिताया था।

गुप्तार घाटः

सरयू नदी के तट पर स्थित इस घाट के विषय में मान्यता है कि इस पवित्र घाट पर भगवान राम ने जल समाधि ली थी। 19वीं सदी में राजा दर्शन सिंह द्वारा इसका नवनिर्माण करवाया गया था। घाट पर राम जानकी मंदिर, पुराने चरण पादुका मंदिर, नरसिंह मंदिर और हनुमान मंदिर स्थित है, जिसके लोग दर्शन कर सकते हैं।

विश्व की सबसे पहली हाईटेक सिटी थी अयोध्याः

तीनों लोकों में विख्यात थी-
महर्षि वाल्मीकि ने लिखा है कि सरयू नदी के तट पर संतुष्ट जनों से पूर्ण धनधान्य से भरा-पूरा, उत्तरोत्तर उन्नति को प्राप्त कोसल नामक एक बड़ा देश था। इसी देश में मनुष्यों के आदिराजा प्रसिद्ध महाराज मनु की बसाई हुई तथा तीनों लोकों में विख्यात अयोध्या नामक एक नगरी थी।

सड़कों पर थी साफ-सफाई-
वाल्मीकि जी सड़कों की सफाई और सुंदरता के बारे में लिखते हैं कि वह पुरी चारो ओर फैली हुई बड़ी-बड़ी सड़कों से सुशोभित थी। सड़कों पर नित्य जल छिड़का जाता था और फूल बिछाये जाते थे। इंद्र की अमरावती की तरह महाराज दशरथ ने उस पुरी को सजाया था। इस पुरी में राज्य को खूब बढ़ाने वाले महाराज दशरथ उसी प्रकार रहते थे जिस प्रकार स्वर्ग में इन्द्र वास करते हैं।

वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया-
वेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है, "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या"। इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। रामायण के अनुसार अयोध्या की स्थापना मनु ने की थी। यह पुरी सरयू के तट पर बारह योजन (लगभग 144 किमी) लम्बाई और तीन योजन (लगभग 36 किमी) चौड़ाई में बसी थी। कई शताब्दी तक यह नगर सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी रहा।


अयोध्या में मनाई गई त्रेतायुग वाली दीपावली
सरयू के तट पर बसी अयोध्या दुल्हन की तरह सजाई गयी थी। 2017 की छोटी दिवाली की शाम अयोध्या के घाट दूर से ही एक झालर में टिमटिमाते नजर आ रहे थे। उस दीपावली को शाम 6 से 7 बजे तक सरयू नदी पर स्थित राम की पैड़ी में 1,71,000 दीप जलाए गए, एक विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। राम की पैड़ी के साथ ही अन्य घाटों को भी दीपों से सजाया गया था।

क्यों खास थी ये दिवाली
दीपावली के दिन 'पुष्पक विमान' से 'राम, सीता और लक्ष्मण' अयोध्या पहुंचे थे। उनके उतरने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया था। भालू, बंदर, घुड़सवार उनके साथ-साथ थे। एक विशेष शोभा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा पर आसमान से हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए गए थे।

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