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जतरा मेले के आयोजन के लिए नीलामी की प्रक्रिया पूरी, लोग कर रहे विरोध

जशपुर: जिले में आयोजित होने वाले पारंपरिक जतरा मेले के आयोजन के लिए नगरपालिका में नीलामी प्रक्रिया पूरी हो गई. इस साल की नीलामी से नगर पालिका को पिछले साल की तुलना में 6 लाख रुपए का मुनाफा भी हुआ.

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इस आमदनी के विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं. लोगों ने मेले में बिकने वाले समान और मनोरंजन साधनों के दामों में बढ़ोतरी होने का आरोप लगाया है. वहीं कुछ लोगों ने जतरा मेले को गोशाल प्रांगण में नहीं लगने देने की बात भी कही है. वहीं पालिका के अधिकारियों का कहना है कि गोशाला समिति से लिखित में ही सहमति प्राप्त है.
पारंपरिक तौर पर की गई शुरुआत
बता दें आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में पारंपरिक तौर पर कई सालों से जतरा मेले का आयोजन किया जाता है. शहर के मध्य में स्थित बाजार डांड़ और गोशाला के मैदान को मिलाकर आयोजन किया जाता है. इस साल भी 14 जनवरी से मेले का आयोजन किया जाना है. इसके आयोजन को लेकर राजस्व की वसूली को लेकर नीलामी की प्रक्रिया की गई थी. नीलामी की प्रक्रिया में 18 मेले के ठेकेदारों ने हिस्सा लिया.
पिछले साल की नीलामी की राशि 11 लाख 1 हजार रुपए से 10% की बढ़ोतरी करते हुए नगर पालिका ने 12 लाख 11 हजार रुपए से बोली की शुरुआत की. नीलामी की बढ़ी हुई राशि पर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नीतिन राय ने विरोध जताया है.
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बीजेपी युवा मोर्चा ने किया नीलामी का विरोध
राय ने नीलामी की प्रक्रिया को जनविरोधी बताते हुए गौशाला प्रांगण में मेले का आयोजन ना होने की बात कही. उन्होंने कहा कि नीलामी की राशि में जो बेतहाशा वृद्धि हो रही है, उसका बोझ आम लोगों को ही उठाना पड़ेगा. बढ़े हुए राजस्व की वसूली के लिए ठेकेदार द्वारा मेले में लगाए जाने वाले दुकानों का किराया बढ़ाया जाएगा. मेले में आय, मनोरंजन के साधनों का भी रेट ज्यादा होगा.
राय ने कहा कि जतरा मेला आदिवासी अंचल की पहचान है. जनजातीय समाज की संस्कृति से जुड़ी हुई है. ये पीढ़ियों से चली आ रही है, लेकिन नगर पालिका ने इसे व्यवसाय में तब्दील कर दिया. सरकारों, नगरपालिका को न तो जशपुर की परंपरा से मतलब है और न ही यहां की संस्कृति को बनाए रखना चाहते हैं.
नगर पालिका सीएमओ का क्या है कहना
इस पूरे मामले में नगर पालिका सीएमओ जितेंद्र कुशवाहा का कहना है कि जतरा मेला आयोजन करने के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. 17 लाख 26 हजार रुपए की उच्चतम बोली पर निर्भय विश्वकर्मा ने ठेका प्राप्त किया है. मेला आयोजन करने के लिए गौशाला समिति से लिखित में पूर्व में ही सहमति प्राप्त कर ली गई है.

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