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श्मशान में शिव की पूजा, देर रात होते हैं दर्शन, जाने क्या है रहस्य

भोपाल। आधी रात का समय हो और कोई आप को मंदिर जाने के लिए कहे वो भी महाशिवरात्रि के दिन तब भी शायद आपको थोड़ा डर लग सकता है, लेकिन यदि यही शिव का मंदिर श्मशान घाट में हो जहां लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता हो तो शायद ज्यादा डरना लाजमी है।


ऐसा ही एक मंदिर है भोपाल के छोला विश्राम घाट में जहां पर महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं की लाखों की संख्या में भीड़ लगती है। शमशान के अंदर जहां महिलाएं जाने से भी डरती हैं, लेकिन इस दिन महिलाएं अपने परिवार के साथ इस मंदिर में शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मनोकामनाएं मांगती हैं।


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मरघट पर बना भोले का ये मंदिर इसलिए है खास
कहा जाता है कि महाशिवरात्रि पर इस मंदिर में आने वाले की हर इच्छा पूरी होती है। भोपाल के छोला शमशान घाट में जहां रात भर श्रद्धालुओं का मेला लगता है। महिलाएं और पुरुष ही नहीं बच्चे भी लंबी कतार में लगते हैं और भूत भावन के दर्शनों को लालायित दिखते हैं। आपको बताते हैं भोपाल का वह श्मशान घाट जहां महाशिवरात्रि की रात को लगता है दर्शनों के लिए मेला।

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आधी रात में इस श्मशान घाट में जाते है भक्त

भोपाल का छोला श्मशान घाट जिसके बारे में कहते हैं कि, भोपाल का सबसे पुराना श्मशान यही है और इसी परिसर में स्थित है एक शताब्दी पुराना यह मंदिर महाशिवरात्रि पर यहां रात भर भक्तों का मेला लगा रहता है। छोला श्मशान घाट परिसर में स्थित है। वैसे तो मरघट में महिलाएं और बच्चे आज भी जाने से बचते हैं और बात यदि आधी रात को जाने की हो तो लोगों का डर स्वाभाविक है।

श्मशान घाट पर स्थित है शिव का ये मंदिर

जब बात भगवान शिव-पार्वती के विवाह की हो तो दर्शन करने के लिए यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखी जा सकती है। भोपाल का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जो श्मशान घाट में स्थित है। यही नहीं यहां भोलेनाथ का श्रृंगार चिता भस्म से किया जाता है। यहां के पंडित की माने तो आज शिवरात्रि पर 7 मुर्दों की भस्म शिवजी को अर्पण की गई है। इसी वजह से शिव श्मशान या कायांत में जाकर बैठे हैं।

श्मशान के अर्थ का समझे रहस्य
कायांत का मतलब है, जहां काया यानी शरीर का अंत होता है। शरीर का अंत होता है, जीवन का अंत नहीं होता है, इसीलिए यह कायांत है, जीवांत नहीं। शम का अर्थ है शव और शान का अर्थ शयन यानी बिस्तर से है। जहां मरे हुए शरीरों को रखा जाता है, वहां शिव रहते हैं। शिव एक ऐसी जगह बैठते हैं, जहां जीवन के मायने पूरी तरह स्पष्ट हैं।

मुक्तेश्वर महाकाल का नयनाभिराम श्रृंगार
अगर आप में भय है, अगर आप खुद को सुरक्षित और कायम रखना चाहते हैं, तो ये आपके लिए स्पष्ट नहीं होगा। ये आपके लिए सिर्फ तभी स्पष्ट होगा, जब आपमें खुद का विस्तार करने और परम को छूने की आकांक्षा है। वहीं दूसरी ओर कलाकार आकर फूलों के बंगले के रुप में ऐसा जाते हैं रंग बिरंगे तरह-तरह के फूलों से मंदिर की शोभा कई गुना बढ़ जाती है। मुक्तेश्वर महाकाल का नयनाभिराम श्रृंगार भक्तों को आनंदित कर देता है।

आधी रात में होती है शिव-पार्वती के विवाह की रस्में
महिलाएं और बच्चे भी भगवान के अलौकिक दर्शनों के लिए लालायित रहते हैं और यह सारा दर्द भूलकर श्मशान घाट के मंदिर में चले आते हैं। मंदिर में महाशिवरात्रि पर भारतीय संस्कृति के अनुसार भगवान शिव-पार्वती के विवाह की रस्में भी पूरी की जाती है। पूरी रात विवाह समारोह में खुशियां मनाई जाती है विवाह के गीत गाए जाते हैं।


यहां मुर्दों की भस्म से होता है शिव का श्रृंगार
शिव परिवार की पसंदीदा चीजें मंदिर में चढ़ाई जाती है। सजे-धजे मंदिर के बाहर शिव पार्वती की पैर पुजाई की व्यवस्था भी की जाती है। श्मशान में स्थित शिव का यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह भी अचरज की बात है कि मंदिर के पीछे मुर्दे जल रहे होते हैं और उन्ही मुर्दों की भस्म से शिवजी का श्रृंगार किया जाता है।

शिव के दर्शन को दूर-दूर से आते है भक्त
कहां जाता है कि भोपाल के इस मंदिर में जो भी श्रद्धालु मन से भोलेनाथ से कुछ भी मांगता है तो, उसकी हर मुराद इस मंदिर से पूरी हो जाती है। यही कारण है कि राजधानी में ही नहीं भोपाल के आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु देर रात यहां दर्शन के लिए आते हैं।

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