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15 के फेर में उलझी रही ये सीटें, आखिरी वक्त तक अटकी रहीं थी सबकी सांसें

भोपाल। कहते हैं सियासत के खेल में आंकड़ों का बड़ा रोल होता है. इन्हीं आंकड़ों में प्रत्याशियों का सियासी भाग्य छिपा होता है. लिहाजा, सबकी टकटकी इन्हीं आंकड़ों पर लगी रहती है. ये आंकड़े इसलिए भी अहम हो जाते हैं क्योंकि कई बार बहुत मामूली अंतर से हार-जीत का फासला तय होता है. पिछले चुनाव में इन 15 सीटों पर 141 वोट से लेकर 1546 वोट के अंतर से प्रत्याशियों की हार-जीत का फैसला हुआ था.

डिजाइन फोटो।


दरअसल, यहां पिछले चुनाव के सियासी समीकरणों की बात कर रहे हैं. जहां मतगणना के वक्त प्रत्याशियों से लेकर पार्टी प्रमुखों तक की सांसे थम सी गयी थी क्योंकि इन सीटों ने चौंकाने वाले परिणाम दिये थे. यही वजह है कि इस बार भी इन सीटों पर सबकी नजरें टिकी हैं. पिछली बार इन सीटों पर कोई हारते-हारते जीत गया था तो कोई जीतते-जीतते हार गया था.
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सुरखी
सागर जिले के अंतर्गत आने वाली सुरखी विधानसभा सीट पर पिछली बार सबसे कड़ा मुकाबला देखा गया था. इस सीट पर हार-जीत का अंतर महज 141 वोटों का था. जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी गोविंद सिंह राजपूत को बीजेपी प्रत्याशी पारुल साहू से मात खानी पड़ी थी. बीजेपी को यहां 59513 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 59372 वोट मिले थे. पारुल की जीत के पीछे उनकी योग्यता भी रही, जिसे खूब जोर-शोर से प्रचारित किया गया था.


जतारा
टीकमगढ़ जिले की आरक्षित विधानसभा सीट जतारा पर भी मुकाबला दिलचस्प हुआ था. उस वक्त कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश अहिरवार ने बीजेपी प्रत्याशी और तत्कालीन सरकार में मंत्री रहे हरीशंकर खटीक को मैदान में चित कर दिया था. हालांकि हार-जीत का अंतर महज 233 वोटों का था. यहां कांग्रेस को 51149 वोट मिले थे तो बीजेपी को 50916 वोट मिले. पर उस वक्त प्रदेश सरकार के मंत्री को हराने की वजह से दिनेश अहिरवार खूब चर्चा में रहे.

मनगंवा
विंध्य अंचल के रीवा जिले में आने वाली विधानसभा सीट मनगंवा पर पिछले चुनाव में बसपा और बीजेपी के बीज जोरदार मुकाबला देखने को मिला था. जहां आखिरी वक्त में बाजी बसपा के हाथ लगी थी. यहां बसपा प्रत्याशी शीला त्यागी ने बीजेपी प्रत्याशी पन्नाबाई प्रजापति को 275 वोटों से चुनाव हराया था. बसपा को यहां 40349 तो बीजेपी को 40074 वोट मिले थे.

बरघाट
सिवनी जिले की बरघाट सीट पर पिछले चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी कमल मर्सकोले और कांग्रेस प्रत्याशी अर्जुन सिंह काकोड़िया के बीच मुकाबाला आखिरी राउंड तक सांसें रोकने वाला था. हालांकि, आखिरी वक्त में बीजेपी प्रत्याशी को महज 269 वोट से जीत मिली थी. यहां बीजेपी को 77122 वोट और कांग्रेस को 76853 वोट मिले थे.

सरदारपुर
धार जिले की आरक्षित विधानसभा सीट सरदारपुर पर भी हार-जीत के फैसले के आखिरी वक्त में सबकी सांसें अटकी हुई थी. लंबी चली कशमकश के बाद यहां बीजेपी प्रत्याशी वेल सिंह भूरिया ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रताप सिंह ग्रेवाल को 529 वोटों से शिकस्त दी थी. बीजेपी को यहां कुल 60192 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 59663 वोट मिले थे.

इच्छावर
सीहोर जिले की इच्छावर विधानसभा सीट पर पिछली बार बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुकाबला आखिरी वक्त तक दिलचस्प दिखा था. जिसमें शिवराज सरकार में मंत्री रहे बीजेपी प्रत्याशी करण सिंह वर्मा को कांग्रेस प्रत्याशी शैलेद्र पटेल के हाथों मात खानी पड़ी थी. हालांकि, हार-जीत का अंतर 744 वोटों का था. कांग्रेस को यहां 74704 वोट तो बीजेपी को 73960 वोट मिले थे.

जबलपुर वेस्ट
जबलपुर जिले के अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीटों में से जबलपुर पश्चिम पर सबसे रोचक मुकाबला देखने को मिला था. जहां कांग्रेस प्रत्याशी तरुण भनोट ने बीजेपी के दिग्गज नेता हरेंद्र जीत सिंह बब्बू को 923 वोटों से पटखनी दी थी. चुनाव के वक्त यह सीट जबलपुर शहर की हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल थी. कांग्रेस को यहां कुल 62668 वोट तो बीजेपी को 61745 वोट मिले थे.

ग्वालियर पूर्व
ग्वालियर पूर्व विधानसभा सीट पर पिछले चुनावों में बीजेपी-कांग्रेस की साख दांव पर लगी थी. बीजेपी ने यहां से माया सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था, जबकि कांग्रेस ने मुन्नालाल गोयल पर दांव लगाया था. जिसमें बीजेपी प्रत्याशी माया सिंह ने 1147 वोटों से जीत दर्ज की थी. यहां बीजेपी को कुल 59824 तो कांग्रेस को 58677 वोट मिले थे. यहां से चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने माया सिंह को मंत्री बनाया था.

जबलपुर पूर्व
जबलपुर पूर्व विधानसभा सीट पर भी पिछली बार मुकाबला रोमाचंक हुआ था. जहां आखिरी वक्त में बीजेपी प्रत्याशी अंचल सोनकर ने कांग्रेस प्रत्याशी लखन घनघोरिया को 1155 वोटों के अंतर से चुनावी मैदान में चित कर दिया था. यहां बीजेपी को कुल 67167 वोट मिले तो कांग्रेस को 66012 वोटों से ही संतोष करना पड़ा था.

मेहगांव
ग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड जिले की मेहगांव विधानसभा सीट पर पिछली बार कांटे का मुकाबला देखने को मिला था. जहां आखिरी वक्त में जीत बीजेपी प्रत्याशी मुकेश चौधरी के हाथ लगी थी. वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी ओपीएस भदौरिया को हार का सामना करना पड़ा था. इस सीट पर हार जीत का फैसला महज 1273 वोटों के अंतर से हुआ था. बीजेपी को यहां कुल 29733 वोट तो कांग्रेस को 28460 वोट मिले थे. पिछली बार इस सीट पर मतदान का आंकड़ा भी कम था.

गुन्नौर
बुंदेलखंड अंचल के पन्ना जिले में आने वाली गुन्नौर विधानसभा सीट पर भी बीजेपी प्रत्याशी महेंद्र बागरी और कांग्रेस प्रत्याशी शिवदयाल बागरी के बीज अच्छा मुकाबला देखने को मिला था. इस सीट पर हार जीत का अंतर 1337 वोट का था. जिसमें बीजेपी को 41980 वोट तो कांग्रेस को 40643 वोट मिले थे. इस सीट का फैसला भी आखरी राउंड में हुआ था.

गुढ़
रीवा जिले की गुढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी सुंदरलाल तिवारी ने आखिरी वक्त में बीजेपी प्रत्याशी नागेंद्र सिंह पर 1382 वोटों से जीत हासिल की थी. सुंदरलाल तिवारी को यहां 33741 वोट तो नागेंद्र सिंह को 32359 वोट मिले थे. यहां मुकाबला कश्मकश भरा रहा था.

पांढुर्णा
छिंदवाड़ा जिले में आने वाली पांढुर्णा विधानसभा सीट पर पिछली बार जोरदार मुकाबला हुआ था. गोटमार मेले के लिये प्रसिद्ध पांढुर्णा में चुनाव के वक्त भी कांग्रेस प्रत्याशी जतन उइके और बीजेपी प्रत्याशी टीकाराम कवरेती के बीच आखिरी वक्त तक 'गोटमार' चलती रही थी. जहां हार-जीत का फैसला 1478 वोटों के अंतर से हुआ था. यहां कांग्रेस को 61741 वोट बीजेपी को 60263 वोट मिले थे.

मलहरा
छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच पिछली बार कांटे की टक्कर दिखी थी. जिसमें बीजेपी प्रत्याशी रेखा यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी तिलक सिंह लोधी को 1514 वोटों से चुनाव हराया था. रेखा यादव को 41779 वोट तो तिलक सिंह लोधी को 40256 वोट मिले थे.

कोतमा
महाकौशल अंचल के अनूपपुर जिले के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीट कोतमा में भी चुनावी फैसला आखिरी वक्त में हुआ था. यहां कांग्रेस प्रत्याशी मनोज अग्रवाल ने बीजेपी प्रत्याशी राजेश सोनी को महज 1546 वोट के अंतर से चुनाव हराया था. जहां कांग्रेस को 38319 वोट तो कांग्रेस प्रत्याशी को 36773 वोट मिले थे.

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सूबे की इन पन्द्रह सीटों पर पिछली बार प्रत्याशियों को बेहद कम अंतर से हार-जीत का सामना करना पड़ा था. इसके अलावा सिरोंज, सीहोर, भगवानपुरा, दिमनी, विजयपुर, शाजापुर, सोनकच्छ, छतरपुर, हटा, सीधी, भीकनगांव, परसवाड़ा विधानसभा सीटों पर भी हार-जीत का फैसला महज तीन हजार वोटों के अंतर से हुआ था. ऐसे में इस बार भी इन विधानसभा सीटों पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी.

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