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शिवराज के इन 10 कमांडो की डूब गयी थी कश्ती, कुछ इस बार भी ठोकेंगे ताल

भोपाल। मध्यप्रदेश में चुनावी रणभेरी बज चुकी है, सभी दलों के योद्धा तैयार हैं, बस अपने सेनापति के आदेश की प्रतीक्षा में हैं, आदेश मिलते ही सब एक दूसरे को चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. हालांकि, पिछले चुनाव में बीजेपी ने मैदान तो मार लिया था, सेनापति शिवराज भी सही सलामत फतह कर चले आये. लेकिन, कई सूरमा मैदान में ही चारो खाने चित हो गये थे, उनमे से कुछ इस बार भी ताल ठोक रहे हैं.

डिजाइन फोटो।


दरअसल, मध्यप्रदेश में सत्ता का हैट्रिक लगा चुकी बीजेपी अब जीत का चौका लगाने के लिए दमखम दिखा रही है. पिछली बार बीजेपी ने 230 सीटों में से 165 पर विरोधियों को चित किया था. लेकिन, उस लहर में भी शिवराज सरकार के दस मंत्री मैदान में धूल फांकते रह गये थे. चुनावी रण में इन्हें विरोधियों के हाथों मात खानी पड़ी. हालांकि, इस बार भी इनमें से कुछ योद्धा मैदान में उतरने को बेताब हैं, पर अब भी इनकी राह आसान नहीं है.
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अनूप मिश्रा
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे और उस वक्त शिवराज सरकार में मंत्री रहे अनूप मिश्रा को भितरवार विधानसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा था. उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी लाखन सिंह यादव ने 6548 वोटों से हराया था. चार बार विधायक रहे मिश्रा को न कोई सुनामी बचा पायी, न कोई लहर उनकी कश्ती को किनारे तक पहुंचा पायी. हालांकि, मिश्रा मोदी लहर पर सवार होकर 2014 के लोकसभा चुनाव में मुरैना से दिल्ली पहुंच गये. लेकिन, वहां शायद उनका मन नहीं लग रहा है, जिसके चलते मिश्रा के इस बार भी विधानसभा चुनाव में उतरने के कयास लगाये जा रहे हैं.


लक्ष्मीकांत शर्मा
तत्कालीन शिवराज सरकार में कद्दावर मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को भी पिछले विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. उन्हें कांग्रेस प्रत्यासी गोवर्धन उपाध्याय ने 1584 वोटों से शिकस्त दी थी. लगातार चार बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके लक्ष्मीकांत शर्मा का विजय रथ यहीं रुक गया. इसके बाद व्यापमं मामले में फंसने के बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा. हालांकि, सियासी गलियारों में इस बार भी उनके चुनाव लड़ने की चर्चा हो रही है.

रामकृष्ण कुसमरिया
बुंदेलखंड की राजनीति में बाबाजी के नाम से पहचान रखने वाले और मंत्री रहे रामकृष्ण कुसमरिया को भी पिछले चुनाव में राजनगर सीट से हार का सामना करना पड़ा था. उन्हें कांग्रेस प्रत्यासी विक्रम सिंह ने 8607 वोटों से हराया था. चार बार विधायक और दो बार सांसद रहे कुसमरिया विधानसभा सीट बदलने के बाद भी अपनी कश्ती किनारे नहीं लगा पाये थे. कुसमरिया इस बार भी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.

करण सिंह वर्मा
सीहोर जिले की इच्छावर विधानसभा सीट पर तत्कालीन मंत्री करण सिंह वर्मा को भी पिछले चुनाव में मुंह की खानी पड़ी थी. उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी शैलेद्र पटेल ने 744 वोटों से मात दी थी. 6 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके वर्मा की 7वीं पारी पर पिछली बार रोक लग गयी थी. यानि करण सिंह चक्रव्यूह का सातवां द्वार भेदने में नाकाम हो गये.

जगन्नाथ सिंह
विंध्य अंचल में बीजेपी का बड़ा चेहरा और मंत्री रहे जगन्नाथ सिंह को भी पिछले चुनाव में चितरंगी विधानसभा सीट पर हार का सामना करना पडा़ था. उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी सरस्वती सिंह ने 9845 वोटों के अंतर से हराया था. विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा का सफर तय कर चुके जगन्नाथ सिंह 2013 में अपनी कश्ती किनारे नहीं लगा पाये.

अजय विश्नोई
तत्कालीन शिवराज सरकार में मंत्री रहे अजय विश्नोई भी जबलपुर जिले की पाटन विधानसभा सीट पर मुंह के बल गिरे थे, उन्हें कांग्रेस के युवा प्रत्याशी नीलेश अवस्थी ने 12736 वोटों के बड़े अंतर से हराया था. विश्नोई इस बार भी सियासी रण में उतरने का मन बना रहे हैं. लेकिन, पाटन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की बात से इनकार कर चुके हैं.

बृजेंद्र प्रताप सिंह
पिछली बार शिवराज सरकार में राज्य मंत्री रहे बृजेंद्र प्रताप सिंह को भी पवई विधानसभा सीट से हार मिली थी. उन्हें कांग्रेस के दिग्गज नेता मुकेश नायक ने 11695 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी थी. बृजेंद्र इस बार भी चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं.

हरिशंकर खटीक
पिछले चुनाव में टीकमगढ़ जिले की जतारा विधानसभा सीट पर मंत्री रहे हरिशंकर खटीक और कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश अहिवार में कांटे की टक्कर हुई थी. हालांकि, यहां खटीक को महज 233 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था. हरिशंकर खटीक इस बार भी चुनाव में उतरने का मन बनाते दिख रहे हैं.

कन्हैयालाल अग्रवाल
तत्कालीन शिवराज सरकार में मंत्री कन्हैयालाल अग्रवाल को भी पिछले चुनाव में हार मिली थी. उन्हें गुना जिले की बमोरी विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह सिसोदिया से 18561 वोटों के अंतर से हराया था. उस वक्त इस जिले में हार की खूब चर्चा हुई थी.

दरशथ लोधी
पिछली सरकार में राज्य मंत्री रहे दशरथ सिंह लोधी को भी पिछले चुनाव में जबेरा विधानसभा सीट से हार मिली थी. उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी प्रताप सिंह ने चुनाव में 11896 वोटों के अंतर से हराया था. दस्सू भैया इस बार भी चुनाव में उतरने का मन बना रहे हैं. हालांकि, देखना होगा इस बार मौका मिलने पर उन्हें जीत मिलती है या नहीं.

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पिछले चुनाव में तो इन दस मंत्रियों को हार का मुंह देखना पड़ा था. लेकिन, पिछली इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बन रहे हैं. जो कइयों का कद कतर सकते हैं. वर्तमान शिवराज सरकार में शामिल कई बड़े मंत्रियों पर भी इस बार हार की तलवार लटक रही है. ऐसे में इन आंकड़ों से इतना तो तय है कि पिछली बार की तरह इस बार भी सियासी दंगल में मुकाबला रोमांचक होगा. जहां हार-जीत के लिये प्रत्याशी एड़ी-चोटी का जोर लगायेंगे.

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