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जयस ने 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का किया एलान, संगठन में ही उठने लगे विरोध के सुर

धार। जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन मतलब 'जयस' ने इन दिनों मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही राजनीतिक दल जयस की गतिविधियों से इन दिनों परेशान होते दिखाई दे रहे हैं. जयस ने विधानसभा चुनाव में 80 विधानसभा सीटों पर अपने युवा समर्थकों को चुनाव में खड़ा करने की बात कही है जिसके बाद से ही दोनों पार्टी के संगठन और नेताओं में बेचैनी पैदा हो गई है.

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अब दोनों राजनीतिक दल जयस से संपर्क भी करने लगे हैं. पिछले दिनों धार जिले के कुक्षी में जयस किसान महापंचायत का आयोजन किया गया था. जयस की इस किसान महापंचायत के कार्यक्रम में मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया भी मंच पर पहुंचे थे. इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में जयस और कांग्रेस के संबंधों पर चर्चाएं तेज हो गई थीं और इस चुनावी समय में जयस के मंच पर मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी का पहुंचना कहीं न कहीं बड़े राजनीतिक संबंधों की ओर इशारा करता है.



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लेकिन जिस संगठन ने मध्यप्रदेश और देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी कांग्रेस और बीजेपी की मुश्किलें बढ़ाने का काम किया है, इस चुनावी समय में ऊंचाईयों की ओर बढ़ते जयस संगठन में सदस्यों के विचारों का टकराव सामने आने लगा है. हम बात कर रहे हैं जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन की, जिसके राष्ट्रीय संरक्षक हीरालाल अलावा हैं, जो आए दिन जयस के मंच से कांग्रेस और बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते रहते हैं. हीरालाल अलावा का कहना है कि आजादी के इतने सालों बाद ही आदिवासियों की तस्वीर नहीं बदली हैं.

हीरालाल ने कहा कि आजादी के पहले जो आदिवासियों की स्थिति थी, आज भी उनकी वही स्थिति है. आज भी धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी जिले का आदिवासी लंगोटी पहने हुए है. उनके जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है. इन भोले-भाले आदिवासियों की आवाज बनकर उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए पांचवीं और छठी अनुसूची लागू करने की मांग जयस ने की है. इसके साथ ही मध्यप्रदेश की विधानसभा तक आदिवासियों, युवाओं को पहुंचाने और प्रदेश में आदिवासियों की सरकार और आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने की बात हीरालाल अलाव ने की.
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हीरालाल अलावा ने कहा है कि वह अब मध्यप्रदेश विधानसभा की 80 विधानसभा सीटों पर जयस समर्थकों को खड़ा करेंगे. उन्होंने कहा कि अपने प्रत्याशियों को जिताकर विधानसभा में भेजा जाएगा और वह आने वाली सरकार में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएगा. इन सब बातों से तो ऐसा लगता है कि आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए जिस संगठन का गठन किया गया था, अब राजनीति में पूरी तरीके से उतर गया है.

वहीं अब कुछ जयस के पदाधिकारी और जयस के कार्यकर्त्ता जयस के राष्ट्रीय संरक्षक हीरालाल अलावा के राजनीति में जाने की बात का विरोध कर रहे हैं और उनका साफ कहना है कि कोई भी सामाजिक संगठन राजनीति रंग में नहीं रंग सकता है. सामाजिक संगठनों को चुनाव लड़ने का कोई भी अधिकार नहीं है ना ही उसे ऐसा करना चाहिए. यह बात धार जिले के मनावर विधानसभा के जयस संगठन अध्यक्ष और मध्यप्रदेश जयस कोर कमेटी के सदस्य राजू एम सोलंकी ने कही है.

राजू एम सोलंकी ने कहा है कि देश में कांग्रेस और बीजेपी की सरकार ने आदिवासियों के उत्थान के लिए कई योजनाएं चलाई हैं. जिनसे आदिवासियों के जीवन में बदलाव हुआ है पर कहीं ना कहीं इन योजनाओं के संचालन में निचले स्थर मैं अभी भी सुधार की आवश्यकता है यदि यह सुधार हो जाएगा तो निश्चित ही आदिवासियों से जुड़ी योजनाओं के चलते आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा. अब एक ही संगठन के दो अलग-अलग पदाधिकारियों के विचारों में मतभेद इस बात की ओर इशारा करता है कि आदिवासी समाज के सर्वांगिक विकास के उद्देश्य से चलते अब जयस संगठन का जो राजनीतिकरण हो रहा है, जिसके चलते ही अब जयस संगठन में भी अब विरोध के स्वर उठने लगे हैं जो आगे चलकर खुलकर सामने आएंगे.


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