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मतदाता सूची मामला: MP में कांग्रेस को 'सुप्रीम झटका', SC ने कमलनाथ की याचिका खारिज की

नई दिल्ली/भोपाल। सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की याचिका को खारिज कर दिया है. कमलनाथ ने फर्ज़ी मतदाता सूची और 10 फीसदी बूथों पर VVPAT का औचक परीक्षण करने के मामले में उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की थी.

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बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 8 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हुई थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है.


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कमलनाथ ने टेक्स्ट फॉरमेट में वोटर लिस्ट सौंपे जाने की मांग की थी. निर्वाचन आयोग ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि वोटर लिस्ट पर आपत्तियां आने के बाद खामियों को पहले ही दुरुस्त कर लिया गया है और याचिका निर्वाचन आयोग को बदनाम करने की साजिश है. सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि मध्यप्रदेश के भोजपुर के वोटर लिस्ट में फोटो के दोहराने के आरोप को निर्वाचन आयोग ने स्वीकार किया था. उन्होंने इसकी सीबीआई जांच की मांग की थी.

सिब्बल ने लगाया था निर्वाचन आयोग के अधिकारियों पर आरोप

सिब्बल ने कहा था कि इस गड़बड़ी में निर्वाचन आयोग के कारण अधिकारी भी शामिल हैं. इस पर निर्वाचन आयोग की ओर से वकील विकास सिंह ने कहा था कि आयोग ने उसका वेरिफिकेशन कर लिया है. भले ही फोटो गलत है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि संबंधित वोटर गलत है. निर्वाचन आयोग ने कहा था कि वो टेक्स्ट फॉर्मेट में वोटर लिस्ट नहीं दे सकते हैं, क्योंकि इससे दुरुपयोग की आशंका है. उन्होंने कहा था कि अगर आयोग की रैंडम आधार पर शिकायत की जाएगी, तो इससे पूरा सिस्टम गड़बड़ा जाएगा.
कमलनाथ पर निर्वाचन आयोग का आरोप

निर्वाचन आयोग ने कमलनाथ पर सुप्रीम कोर्ट में बनावटी सबूत रखने का आरोप लगाया था. कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया था. आयोग ने कहा था कि हमारी वेबसाइट में मौजूद लिस्ट में हेर-फेर कर उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया. आयोग ने फर्जी सबूत पेश कर कोर्ट को गुमराह करने का केस चलाने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान कमलनाथ के वकील कपिल सिब्बल ने सफाई दी थी कि एक निजी वेबसाइट में ये लिस्ट थी. हमने चुनाव आयोग को भी ये लिस्ट सौंपी है. तब कोर्ट ने आयोग से कहा था कि इस बात की जांच करें कि क्या आयोग को भी ये लिस्ट सौंपी गई थी. अगर हां तो आपने निजी वेबसाइट के खिलाफ क्या कार्रवाई की.
कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग की कार्यपद्धति में रुकावट डालने का आरोप

पिछले 18 सितंबर को निर्वाचन आयोग ने कमलनाथ की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि कांग्रेस बार-बार सुप्रीम कोर्ट में आकर आयोग की कार्यपद्धति में रुकावट न डाले. आयोग ने कहा था कि कांग्रेस को एक खास अंदाज में चुनाव कराने के दिशा निर्देश जारी न करवाए. आयोग ने कहा था कि चुनाव आयोग कानूनी प्रावधान के तहत ही चुनाव कराता है. आयोग ने कहा था कि किसी याचिका के जरिए चुनाव आयोग को ये निर्देश देने की मांग नहीं की जा सकती कि किस तरीके से चुनाव कराए जाएं. कांग्रेस नेता कमलनाथ ने मांग की थी कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में हर विधानसभा क्षेत्र से कम से कम दस फीसदी वीवीपीएटी पर्चियों की रैंडम गिनती की जाए और उसका ईवीएम से मिलान किया जाए. आपको बता दें कि मध्यप्रदेश की मतदाता सूचियों के सत्यापन में 24 लाख फर्जी वोटरों के नाम सामने आए हैं. परीक्षण के बाद ये नाम हटा दिए गए हैं. पुनरीक्षण के दौरान 11 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं. अब प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 4 करोड़ 94 लाख हो गई है. मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव हैं.

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