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अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन मामला: कांग्रेस ने उठाये सवाल, 'जानबूझकर आचार संहिता में लटकाया'

भोपाल। सीएम शिवराज के एलान के बाद भी अध्यापकों का संविलियन शिक्षा विभाग में नहीं हो सका. सरकारी लालफीताशाही कहें या फिर जानबूझकर प्रक्रिया में इतनी देरी की गयी कि चुनाव आचार संहिता के लगते ही प्रक्रिया को रोक दिया गया. यही वजह है कि प्रदेश के ढाई लाख अध्यापक अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं. इस मामले पर कांग्रेस ने भी सवाल खड़े कर दिये हैं.

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कांग्रेस ने सवाल खड़े करते हुये कहा कि संघ समर्थित और भाजपा के लोगों से भरी पडी जन अभियान परिषद के सभी लोगों को तो बेक डेट में नियमित कर दिया गया, लेकिन अध्यापकों को जानबूझकर लटकाया कर उन्हें आचार संहिता के दायरे में फंसा दिया.


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मध्यप्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र ने कहा कि 'इन्होंने निर्णय लेने में देरी इसलिए की, क्योकिं ये करना नहीं चाहते थे और देरी करते करते इसी बात का इंतजार कर रहे थे कि आचार संहिता लगेगी, तो उनका बचाव हो जाएगा और कहने हो जाएगा कि हमनें तो कर दिया.' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने भाजपा समर्थित लोगों को नियमित कर दिया. लेकिन ढ़ाई लाख लोग अध्यापकों के साथ धोखा किया. स्थिति सामने और स्पष्ट है और यही सरकार की नीति है.

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