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पहाड़ का सीना चीर बनाया था रास्ता, अब उठी उस 'माउंटेन मैन' को 'भारत रत्न' देने की मांग

पटना। 'पर्वत पुरुष' दशरथ मांझी को उनके जन्मदिन पर याद किया गया। हम पार्टी के अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने उन्हें इस मौके पर श्रद्धा सुमन अर्पित की, साथ ही सरकार से उन्हें भारत रत्न देने की मांग की। उन्होंने कहा कि वे हमसब के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं।

माउंटेन मैन को हम के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि


पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने दशरथ मांझी की जयंती पर कहा कि लोगों के लिए वह प्रेरणा स्रोत हैं लेकिन मुझे एक बात की पीड़ा आज भी है कि मरणोपरांत उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला। जीतनराम मांझी ने सरकार से मांग की है कि दशरथ मांझी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए।



दशरथ मांझी (फाइल फोटो)
कठिन मेहनत से पाया मुकाम
मगध क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले दशरथ मांझी आज 'माउंटेन मैन' के नाम से जाने जाते हैं। दशरथ मांझी भले ही आज दुनिया में ना हो लेकिन वह लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं कठिन परिश्रम और सतत प्रयास के जरिए किसी भी मुकाम को हासिल करने का जज्बा दशरथ मांझी ने दिखाया था၊

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कौन थे दशरथ मांझी
गया के करीब गहलौर गांव के रहने वाले दशरथ मांझी एक ऐसा नाम जो इंसानी जज्‍़बे और जुनून की मिसाल है। वो दीवानगी, जो प्रेम की खातिर ज़िद में बदली और तब तक चैन से नहीं बैठी, जब तक कि पहाड़ का सीना चीर दिया। पत्नी के चले जाने के गम से टूटे दशरथ मांझी ने साल 1960 से 1982 के बीच दिन-रात एक कर 360 फुट लंबा, 25 फुट गहरा और 30 फुट चौड़ा रास्ता बना डाला। जिससे गया के अतरी और वज़ीरगंज ब्लॉक का फासला 80 किलोमीटर से घटकर 13 किलोमीटर रह गया। साल 2007 में 73 बरस की उम्र में उनका निधन हो गया।

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