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बिहार में लागू हुई टैक्सी एग्रीगेटर परिचालन पॉलिसी, सरकारी नियंत्रण में चलेंगी ओला व उबर

पटना: राज्य में टैक्सी एग्रीगेटर परिचालन पॉलिसी की शुरुआत कर दी गई है. अब में ओला और उबर जैसी वाहन कंपनियों को वाहनों के परिचालन के लिए कॉमर्शियल लाइसेंस लेना अनियवार्य कर दिया गया है.

डिजाइन इमेज.


इस प्रकिया के बाद बिहार उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिसमें टैक्सी एग्रीगेटर पॉलिसी लागू है. इस प्रक्रिया के बाद सरकार द्वारा निर्धारित किराया पर ही वाहन एजेंसियों को सेवा देनी होगी. इसके लिए अब कंपनियों को कॉर्मशियल लाइसेंस लेना जरुरी होगा. अब कोई भी कंपनी बिहार में तब तक समूह में टैक्सी का परिचालन नहीं कर सकती जब तक लाइसेंस अधिकारी से अनुमति प्राप्त न हो. परिवहन सचिव संजय अग्रवाल ने इसकी जानकारी दी है.
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इसके अंतर्गत आवेदक को 3 वर्षों के लिए लाइसेंस मिलेगा. इससे पहले वाहन के लिए औपबंधिक लाइसेंस लेना जरूरी होगा जो 30 दिनों तक के लिए मान्य होगा. इस फैसले के बाद बिहार में 24 घंटे टैक्सी, बाइक टैक्सी को बुक करा सकेंगे. पॉलिसी के तहत मोबाइल एप के जरिए टैक्सी या कैब की सुविधा देने वाली एजेंसियों के लिए शर्तें निर्धारित की गई हैं.

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राज्य सरकार समय समय पर गजट में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा टैक्सी के लिए अधिकतम और न्यूनतम किराया के संबंध में निर्देश जारी करेगी. वहीं, लाईसेंसधारी, किराया दर प्रदर्शित करेगा और वेबसाइट, इंटरनेट, मोबाइल एप या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किराया का रेट उपलब्ध करेगा. नियमों के तहत बिना निबंधित लाईसेंसधारी द्वारा कोई टैक्सी, मोटर बाइक किसी एग्रीगेटर के माध्यम से भाड़े पर नहीं दी जाएगी.

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