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यहां के किसानों के फूलों से होती है भोलेनाथ की पूजा, अब इन्हें मिलेगा 'आत्मा' का साथ

देवघर: देव की नगरी में आने वाले तमाम भक्तों की इच्छा होती है कि वह भोलेनाथ का जलाभिषेक ओर उनका रुद्राभिषेक करें. लेकिन पिछले कुछ समय से फूलों की मात्रा में कमी देखी जा रही है. इसकी वजह है मलहरा गांव के लोगों का फूलों की खेती से मुंह मोड़ना.

देखें वीडियो।


जिले में मलहारा इकलौता गांव है जहां के किसान सिर्फ फूलों की खेती करते हैं. मंदिर आने वाले तमाम भक्तों हाथ में फूलों से सजी टोकरी इन्हीं की देन होती है. लेकिन अब यहां के किसान अपनी पारंपरिक खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं. वजह है झारखंड सरकार की इनसे बेरुखी.
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मलहारा गांव के लोगों का कहना है कि सरकार का किसानों के लिए चलाए जा रहे किसी भी योजना लाभ इनको अब तक नहीं मिला है. यही नहीं कई योजनाओं की तो इन्हें जानकारी भी नहीं है. जबकि सरकार फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रूपए का फंड दे रही है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है. इन किसानों के पास सिंचाई के लिए न तो पम्प सेट है और न ही किसी डीप बोरिंग ही कराई गई है. ऐसे में यहां के किसान अपनी परंपरा को बचाने के लिए जैसे-तैसे फूलों की खेती कर रहे हैं.

इस बाबत जब हमने उद्यान विभाग के अधिकारी से संपर्क साधा तो उनका फोन बन्द मिला. जबकि आत्मा परियोजना के अधिकारी ने मामले को गंभीर बताते हुए फौरन किसानों के लिए टूर ओर ट्रेनिंग का इंतजाम करने की बात कही.


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