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CJI दीपक मिश्रा पर आरोप लगाने वाले जस्टिस चेलमेश्वर ने फिर की ऐसी टिप्पणी

नई दिल्ली। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा पर केस रेफर करने में पक्षपात करने का आरोप लगाने वाले जस्टिस चेलमेश्वर ने फिर एक ऐसी टिप्पणी कर दी है जिसके लिए उन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के दूसरे शीर्ष जस्टिस चेलमेश्वर (फाइल फोटो)।


दरअसल, जस्टिस चेलमेश्वर ने महाराष्ट्र सरकार की एक याचिका सिर्फ इसलिये खारिज कर दी क्योंकि याचिका की भाषा 'अस्पष्ट' थी। सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सीनियर मोस्ट जस्टिस चेलमेश्वर ने महाराष्ट्र सरकार की यह याचिका इस आधार पर खारिज कर दी कि अर्जी में लिखी गई भाषा समझ नहीं आ रही है। जस्टिस चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली बेंच ने देरी होने के आधार पर बरी किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।

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हलफनामे को देखने के बाद कहा
कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामे को देखने के बाद कहा कि कम से कम इसकी भाषा तो ऐसी होनी ही चाहिए, ताकि यह समझ में आ सके। राज्य सरकार ने याचिका दाखिल करने में देरी की वजह बताने के लिए जो हलफनामा दायर किया उसका कुछ अंश इस प्रकार है- "…the State Government was sent of relation of Legislative Assembly in State of Maharashtra when the present Government came in existence the total staff of Government Advocate penal was changed. Due to disturbances, some files could not have been traced and a proper step of filing has not been taken..."

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'कोई अर्थ नहीं निकलता'
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, “ऊपर (अंग्रेजी में) जो लिखा गया है उसका कोई अर्थ नहीं निकलता है। याचिकाकर्ता के वकील के कहने का मतलब यह है कि राज्य में तीन साल पहले नई सरकार बनी और सरकारी वकीलों का नया पैनल बना है।”

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निजी तौर पर पड़ताल करने का निर्देश
कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से याचिका दायर की गई है, वह उसे पसंद नहीं है। कोर्ट ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को इस मामले की निजी तौर पर पड़ताल करने का निर्देश दिया और कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका जल्दी क्यों नहीं दायर की गई। आखिर राज्य क्यों इतनी असावधानीपूर्वक आवेदन दाखिल करता है।

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