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AAP के 20 विधायकों पर फंसा पेंच! राष्ट्रपति के फैसले के बाद भी कोर्ट करेगी सुनवाई

नई दिल्ली। दिल्ली के आम आदमी पार्टी के अयोग्य ठहराए गए विधायकों की याचिका पर सुनवाई की गई। इस दौरान AAP विधायकों की ओर से वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन ने जो कहा, पढ़ें पूरी खबर...।

डिजाइन फोटो।


कोर्ट में वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन ने कहा कि आप विधायकों को कोई भी वित्तीय फायदा नहीं दिया गया था और न ही कोई अलग से ऑफिस दिया गया था। यह पद लाभ का पद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने उन्हें नोटिस देने के बाद उन्हें कभी सुनवाई का मौका नहीं दिया। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी। केवी विश्वनाथन ने यूवी रमन्ना के केस का उदाहरण दिया। उन्होंने दिव्य प्रकाश और जया बच्चन के केस का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कंपेनसेटरी अलाउंस को लाभ के पद की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। आप विधायकों ने कभी भी आर्थिक लाभ नहीं लिया।


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कोर्ट ने पूछे कुछ ऐसे सवाल
वहीं पिछले 8 फरवरी को कोर्ट ने पूछा था कि कार और दफ्तर जैसी सुविधाओं के लिए ये पद मिला था लेकिन उन्होंने भले ही यह सुविधा न लिया हो, लेकिन उस पद पर रहते हुए लाभ के पद के दायरे में कैसे नहीं आएंगे? कोर्ट ने कहा था कि मुख्यमंत्री द्वारा 21 संसदीय सचिवों को नियुक्त किया गया और उन्हें काम बांटे गए।

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आयोग निजी पक्षकार की तरह व्यवहार कर रहा
पिछले 7 फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया था। निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट से कहा कि चूंकि राष्ट्रपति ने आयोग की सिफारिश पर मुहर लगा दी है इसलिए अब यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इसके जवाब में आप विधायकों ने कहा कि निर्वाचन आयोग निजी पक्षकार की तरह व्यवहार कर रहा है। निर्वाचन आयोग अर्ध न्यायिक प्राधिकार की तरह काम नहीं कर रहा है।

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हाईकोर्ट ने आयोग को नोटिस जारी किया था
पिछले 30 जनवरी को हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी तक जवाब मांगा था। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वे आप विधायकों को अयोग्य ठहराने के अपने फैसलों के बारे में विस्तृत हलफनामा पेश करें। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह मामले के निपटारे तक उप चुनावों की घोषणा न करें।

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राष्ट्रपति के अयोग्य ठहराये गए नोटिफिकेशन को चुनौती दी
आपको बता दें कि पिछले 29 जनवरी को जस्टिस विभू बाखरु की सिंगल बेंच ने इस मामले को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच को रेफर कर दिया था। पिछले 23 जनवरी को आम आदमी पार्टी के विधायकों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राष्ट्रपति के अयोग्य ठहराये जाने के नोटिफिकेशन को चुनौती दी। राष्ट्रपति ने निर्वाचन आयोग की सिफारिश पर 20 जनवरी को आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने का नोटिफिकेशन जारी किया था।

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विधायकों ने याचिका वापस ले ली
पिछले 22 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी के 6 विधायकों की याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है इसलिए इस याचिका का अब कोई मतलब नहीं रह जाता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को इस याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी थी जिसके बाद विधायकों ने याचिका वापस ले ली थी।



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