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कश्मीर की मस्जिदों पर भी लग सकता है लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध!

नई दिल्ली। यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंदिरों-मस्जदों पर लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लगाया था। अब कश्मीर में भारतीय सेना मस्जिदों पर लाउडस्पीकर लगाने को प्रतिबंधित करने की बात सोच रही है।

मस्जिदों पर लाउडस्पीकर (प्रतीकात्मक)।


सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को दावा किया कि जम्मू कश्मीर में सोशल मीडिया और सरकारी स्कूल ‘दुष्प्रचार अभियान’ चला रहे हैं जिससे युवा कट्टरता की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने राज्य में मस्जिदों और मदरसों पर ‘कुछ नियंत्रण’ की वकालत भी की। उन्होंने कहा कि राज्य में इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है। रावत ने कहा कि दुष्प्रचार रोकने के लिए मस्जिदों और मदरसों पर कुछ हद तक नियंत्रण के मुद्दे पर विचार किया जा रहा है।


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कश्मीरी बच्चों में अलग देश की सोच पैदा करने की कोशिश
सेना दिवस की पूर्व संध्या पर संवाददाता सम्मेलन में जनरल रावत ने कहा कि जम्मू कश्मीर के सरकारी स्कूलों की हर कक्षा में भारत के नक्शे के अलावा राज्य का अलग से नक्शा लगा है जो दिखाता है कि बच्चों में एक तरह की ‘अलग पहचान’ की सोच पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें जो नुकसान हुआ है, वह सोशल मीडिया की वजह से है। जम्मू कश्मीर में बहुत बड़े स्तर पर दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें सोशल मीडिया और स्कूलों के माध्यम से युवकों को कट्टर बनाया जा रहा है।’’ रावत ने कहा, ‘‘एक और मुद्दा मदरसों तथा मस्जिदों का है। छात्रों को जो बताया जा रहा है या जो गलत जानकारी दी जा रही है, वो मदरसों और मस्जिदों के जरिये दी जा रही है। मुझे लगता है कि उन पर कुछ पाबंदी लगानी होगी और हम इस बारे में विचार कर रहे हैं।’’

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स्कूल में दो नक्शे
जनरल ने यह भी कहा कि कश्मीर में पथराव करने वाले कुछ युवक सरकारी स्कूलों के हैं और राज्य में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘आप कश्मीर के किसी स्कूल में जाएंगे तो आपको दो नक्शे देखने को मिलेंगे। एक भारत का नक्शा और दूसरा जम्मू कश्मीर का। हर कक्षा में हमेशा दो नक्शे होते हैं। जम्मू कश्मीर के अलग से नक्शे की क्या जरूरत है। अगर आप अलग नक्शा लगा रहे हैं, इसका मतलब हर राज्य का अलग नक्शा लगाया जा सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसका बच्चों के लिए क्या मतलब है। यही कि मैं देश का हिस्सा हूं लेकिन मेरी अलग पहचान भी है। इसलिए बुनियादी समस्या इस बात में निहित है कि जम्मू कश्मीर में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बिगड़ गया है।’’

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सद्भावना विद्यालयों को ऊंचा दर्जा
जनरल रावत ने कहा कि डीपीएस जैसे स्कूलों के बच्चे पथराव जैसी गतिविधियों में लिप्त नहीं मिले और यही वजह है कि सेना द्वारा चलाये जाने वाले सद्भावना विद्यालयों को ऊंचा दर्जा दिया जाता है। सेना प्रमुख ने कहा कि और अधिक पब्लिक स्कूल, और अधिक सीबीएसई स्कूल खोलना आगे बढ़ने का एक तरीका है। रावत ने ज्यादा ब्योरा तो नहीं दिया लेकिन कहा, ‘‘कश्मीर के स्कूलों में....सरकारी स्कूलों में क्या पढ़ाया जा रहा है। मुझे तभी खुशी होगी अगर आप कुछ स्कूलों में जा सकें और कक्षाओं में जाकर देखें कि क्या सिखाया जा रहा है।’’

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