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चमकीली मिठाई पर होता है मांस का इस्तेमाल! अगर नहीं पता तो ये पढ़ें

नई दिल्ली। देश में कोई भी त्योहार या शादी ब्याह हो तो लोग खुशी में चांदी के वर्क वाली ये मिठाईयां खूब खाते हैं। लेकिन आपको नहीं पता होगा कि मिठाई पर लगने वाला चांदी का वर्क कैसे तैयार होता है और जब आपको इसके बारे में पता चले तो शायद आप मिठाई खाना छोड़ दें।

देखें वीडियो।


समाज सेवी ओर आरटीआई एक्टिविस्ट हरपाल राणा ने एक रिपोर्ट के हिसाब से बताया कि चांदी के वर्क वाली मिठाई दिखने में जितनी सुंदर है, उसी चांदी के वर्क के बनने की कहानी बेहद ही घिनौनी है।


क्या कहते हैं दुकानदार
हमने जब इस बारे में मिठाई बनाने वाले एक दुकानदार से बात की तो उसने बताया कि हम तो चांदी का वर्क मिठाइयों के लिए खारी बावली से लेते है। जहां ये 300 से 400 रुपये में एक गड्डी के हिसाब से मिलता है। इसको लगाने से मिठाई 30 रुपये से 40 रुपये किलो के हिसाब से मंहगी बिकती है और ग्राहक भी वर्क लगी मिठाई ही मांगते भी है।

जानवरों की खाल का होता है प्रयोग
सालों से लोग वर्क लगी मिठाई को शाकाहारी समझ कर खा रहे है। लेकिन इसी शाकाहारी मिठाई की हकीकत आपको हिला देगी। मिठाई में लिपटी चांदी की चमक के पीछे जानवरों की खाल का प्रयोग होता है। इसमें जानवर के अंश का इस्तेमाल करके चांदी का वर्क बनाया जाता है।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार
सरकार ने भी नोटिफिकेशन जारी करके चांदी के वर्क में जानवर के अंश का इस्तेमाल नहीं करने को कहा है। बता दें कि एक आंकड़े के अनुसार देश में चांदी के वर्क की सालाना मांग करीब 275 टन की है।
चांदी के वर्क का कारोबार फिलहाल भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान में है जो की पूरी तरह असंगठित क्षेत्र के हाथ में है। यही वजह है कि इसके कारोबार का सही-सही आंकड़ा किसी के पास नहीं है।

इन दो तरीकों से बनाई जाती है चांदी
आरटीआई एक्टिविस्ट हरपाल राणा ने बताया कि चांदी का बाजार परंपरागत रूप से देश में चांदी का वर्क बूचड़खानों से ली गई जानवरों की खालों और उनकी आंतों के बीच रखकर हथौड़ों से पीटकर तैयार किया जाता है।
इसके अलावा विदेशी मशीनों से भी चांदी का वर्क तैयार होता है, इसमें एक स्पेशल पेपर और पॉलिएस्टर कोटेड शीट के बीच चांदी को रखकर उसके वर्क का पत्ता तैयार होता है। इसमें जानवर के अंश का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

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पुराने तरीके से 90 फीसदी वर्क
चूंकि ये मशीनें महंगी हैं और देश में गिनी चुनी कंपनियों के पास ही हैं, ऐसे में इनका चांदी का वर्क महंगा भी पड़ता है और कम भी। एक अनुमान के मुताबिक देश में 90 फीसदी चांदी का वर्क पुराने तरीके से जानवरों के अंश को इस्तेमाल करके बनता है जबकि 10 फीसदी मशीनों से तैयार होता है।

सरकारी आदेश का असर
सरकार ने चांदी के वर्क को बनाने में जानवर के अंश का इस्तेमाल नहीं करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य और फूड एक्सपर्ट बिजॉन मिश्रा का भी कहना है कि चांदी के वर्क बेचते समय बताना चाहिए कि ये मांसाहारी है या शाकाहारी। इसके पैकेट पर हरा और लाल निशान होना चाहिए।



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