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EXCLUSIVE: नहीं है वोगस वोटर, MP- CG- RAJ चुनाव पर EC का बड़ा बयान

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर पूरी सख्ती से लागू होगा. उम्मीदवारों के आपराधिक बैकग्राउंड की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी. इसे मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचाया जाएगा.

बोगस वोटर के सवाल पर ओपी रावत के जवाब.


ईटीवी भारत की दिल्ली ब्यूरो प्रमुख नंदिनी सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त से एक्सक्लूसिव बातचीत की. चुनाव आयुक्त ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी आदेश है, उसे वह लागू करेंगे.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि वैसे तो यह राजनीतिक पार्टियों की जवाबदेही है कि वे अपने उम्मीदवारों के बैक ग्राउंड को मीडिया में सार्वजनिक करें, लेकिन आयोग इस पर पैनी नजर बनाए रखेगा.
सवालः यह कितना व्यावहारिक होगा, खासकर नकारात्मक पब्लिसिटी है, तो कोई भी राजनीतिक पार्टी इसे किस हद तक लागू करेगी.
जवाबः हम इसे सख्ती से लागू करेंगे. हां, हमें ये देखना है कि इस खर्चे को कहां एड करें. क्या सीलिंग में जोड़ेंगे या नहीं. हर राज्य में हमारे मुख्य निर्वाचन अधिकारी होते हैं, वे इसे सुनिश्चित करेंगे कि पूरी तरह सरे लागू किया जाए.
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सवालः इन चार राज्यों में कब होगी चुनाव की घोषणा.
जवाबः देखिए, हम कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं. लेकिन जैसे ही तैयारी पूरी हो जाएगी, हम इसकी घोषणा कर देंगे.
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सवालः तेलंगाना में चुनाव आयोग की टीम गई. उनका क्या मूल्यांकन रहा है.
जवाबः हमारी टीम वहां गई. यह टीम हमें रिपोर्ट सौंपेगी. अपनी समीक्षा पेश करेगी. उसके आधार पर हम कोई निर्णय लेंगे. तेलंगाना विधानसभा चुनाव को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है.


सवालः क्या चार राज्यों के साथ ही तेलंगाना विधानसभा के चुनाव होंगे.
जवाबः इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता है. संभावनाओं पर कुछ कहना सही नहीं होगा.
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सवालः जिन चार राज्यों में चुनाव होने जा रहा है, वहां पर वोगस वोटर लिस्ट की शिकायत आई है, उसे कैसे निपटेंगे.
जवाबः दरअसल, यह एक सतत प्रक्रिया है. हर साल नए लोग वोटर लिस्ट से जुड़ते हैं. कुछ लोगों की मृत्यु हो जाती है, उनका नाम हटाना होता है. कुछ लोग ट्रांसफर हो जाते हैं, नए जगह पर उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ता है, लेकिन पुराने जगह पर बना रहता है. इससे कई बार भ्रम की स्थिति हो जाती है.
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इसके लिए भी हमने डि-डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर विकसित किया है. इसके जरिए यह समस्या खत्म हो जाएगी. हमारे बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर इसे वेरिफाई करते हैं, और पूछते हैं कि क्या है स्थिति. उसके बाद

यदि वोटर का नाम एक जगह से ज्यादा स्थानों पर है, उसे डिलीट कर दिया जाता है. राजनीतिक पार्टी कई बार इसे लेकर शिकायत करते हैं, लेकिन उन्हें यह जानना चाहिए कि यह सतत प्रक्रिया है, जारी रहती है.

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सवालः जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक पार्टियां यात्राएं निकाल रही हैं. आरोप ये लगता है कि उनमें जनता का पैसा खर्च होता है, उस पर कैसे रोक लगाएंगे.
जवाबः ये तो राजनीतिक पार्टियों पर निर्भर करता है. उन्हें पहल करनी चाहिए. हर पार्टी कभी न कभी सत्ता में रह चुकी है. उन्हें इस तरह के कानून बनाने चाहिए. दुर्भाग्यवश सत्ता में रहते हुए पार्टियां ऐसा नहीं करती हैं. चुनाव आयोग की सीमा है. वह बिना कानून के ऐसा कुछ नहीं कर सकती है. हां, अगर शिकायत आती है, हम कार्रवाई करेंगे.


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