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'हे पद्मावत'... राजनीति की बहती गंगा बनी फ़िल्म

चंडीगढ़। आंदोलन....आंदोलन...आंदोलन ये वो शब्द हैं, जो पिछले कुछ दिनों से लगातार मीडिया में बने हुए हैं। मुद्दा कोई भी हो, हर कोई आंदोलन की धमकी देता है। इस शब्द का ताजा इस्तेमाल हरियाणा में किया गया है। जहां कांग्रसियों ने हरियाणा में 'पद्मावत' फिल्म की रिलीज पर आंदोलन की धमकी दी है।

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'पद्मावती' से 'पद्मापत' के बाद भी जारी है राजनीति
सेंसर बोर्ड से 'पद्मावती' फिल्म का नाम बदलकर 'पद्मावत' के नाम से पास किये जाने के बाद भी फिल्म पर राजनीति जारी है। ऐसा लगता है कि 'पद्मावती' फिल्म एक बहती गंगा है और इसमें कोई भी डुबकी लगाने का मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहता। तभी तो अब हरियाणा कांग्रेस के मीडिया सचिव संदीप खरकिया ने फिल्म को लेकर ताजा बयान दिया है। संदीप खरकिया ने मनोहर सरकार से फिल्म पर हरियाणा में रोक लगाने की मांग की है।


वंसुधरा सरकार लगा चुकी है फिल्म पर बैन
आपको पता ही होगा कि राजस्थान सरकार फिल्म पर पहले ही बैन लगा चुकी है। ऐसे में क्या बीजेपी और क्या कांग्रेस। सभी पार्टीयां अपने-अपने राज्य की राजनीति के हिसाब 'पद्मावती' विवाद का फायदा उठाने में व्यस्त है। राजस्थान में भी कुछ समय बाद विधानसभा चुनाव है ऐसे में वंसुधरा राजे राजपूतों को नाराज करने का कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती। वहीं हरियाणा की बात करें तो यहां भी पद्मावती को लेकर खूब माहौल बनाया गया।

'पद्मावती' से सूरजपाल अम्मू ने बटोरी थी सुर्खियां
बीजेपी मीडिया कॉर्डिनेटर सूरजपाल अम्मू तो रोज नेशनल मीडिया की डिबेट में बैठकर ज्ञान देते नजर आए थे, लेकिन उनका ये ज्ञान देना खुद उनकी पार्टी को ही पंसद नहीं आया, हालत ये हो गए कि खुद उन्हीं के पार्टी के सीएम मनोहर लाल उनसे किनारा करते नजर आए। जिसके बाद अम्मू ने पद से इस्तीफा दे दिया। पद्मावती फिल्म विवाद में कूदे अम्मू ने एलान किया था कि जो भी निर्देशक संजय लीला भंसाली का सिर काटकर लाएगा उसको वो 10 करोड़ रुपए का इनाम देंगे। उनके इस विवादास्पद बयान के बाद भाजपा ने उन्हें एक नोटिस जारी किया। अम्मू ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को चिट्ठी लिख अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने इस चिट्ठी में लिखा था कि मुख्यमन्त्री मनोहर लाल जी द्वारा किये गये व्यवहार से मन व्यथित है।

'दीपिका की नाक काट देंगे'
वहीं करणी सेना तो दीपिका के नाक के ही पीछे पड़ गई थी। करणी सेना के अध्यक्ष लोकेंद्र नाथ ने कहा था कि 'हमें उकसाना जारी रखा गया तो हम दीपिका की नाक काट देंगे। वहीं गुजरात चुनाव के दौरान बीजेपी सरकार फिल्म पर एक तीर से दो शिकार करते नजर आई थी। गुजरात में चुनाव के बहाने ये दलील दी गई कि इस समय राज्य में चुनाव है फिल्म के कारण यहां माहौल खराब हो सकता है और दंगा भड़क सकता है, लेकिन बीजेपी की मंशा कहीं न कहीं राज्य के राजपूतों को नाराज नहीं करने की ही थी। अब चुनाव खत्म हो चुके हैं। विवाद चैप्टर लगभग समाप्ती की ओर है और फिल्म का नाम भी बदल कर पद्मावती से पद्मावत कर दिया गया है लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस और बीजेपी हर राज्य में अपने हिसाब से फिल्म पर राजनीतिक रोटियां सेंकने से बाज नजर नहीं आ रही। ऐसे में इससे क्या समझा जाए, क्या देश में जो भी आदोंलन होते हैं उसके लिए राजनीतिक पार्टियां जिम्मेदार हैं?, क्या जनता के पास इन विवादों के लिए वक्त है। ये निश्चित तौर आपको सोचना चाहिए!




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