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सामने से नहीं होते मां श्‍यामाकाली के दर्शन, मंडी के राजा को कैद से करवाया था आजाद!

मंडी: मां काली का श्यामाकाली प्राचीन टारना माता मंदिर मंडी में स्थित है. मंदिर में मां के दर्शन सामने से नहीं होते हैं. श्रद्धालु केवल मां के मुख के ही दर्शन कर सकते हैं.

मंडी का श्‍यामाकाली मंदिर (वीडियो)


मंदिर का निर्माण माह की दाल और चूना पत्थर से जयपुर और जोधपुर के कारीगरों ने किया था. मंदिर के गर्भ गृह में सोने की मिनाकारी करवाई गई है. बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण मंडी रियासत के राजा श्याम सेन ने किया था. मंदिर मंडी नग्गर से लगती टारना पहाड़ी पर स्थित है, जिस वजह से इसे टारान माता का मंदिर भी कहा जाता है.
राजा श्याम सेन ने रियासत मंडी पर वर्ष 1664 से लेकर 1679 तक राज किया था. श्याम सेन ने इस मंदिर का निर्माण सुकेत सुंदरनगर के राजा जीत सेन से लोहारा की लड़ाई में जीतने पर अपनी कुल देवी से की गई मन्नत पूरी होने पर करवाया था. इस ऐतिहासिक घटना का विवरण 'गजेटियर ऑफ मंडी स्टेट' और 'हिस्ट्री ऑफ मंडी स्टेट' में मौजूद है.
मंदिर में स्थापित काली मां की मूर्ति राजा श्याम सेन की कुल देवी की है. वहीं, इसे रियासत मंडी के राजाओं की कुल देवी की भी मान्यता प्राप्त है. बहुत सालों के बाद राजा जालिम सेन ने वर्ष1826 ये 1839 तक मंदिर के गर्भ गृह में सोने-चांदी का काम करवाया.
राजा बलवीर सेन ने वर्ष 1839 से 1851 तक मंडी रियासत पर शासन किया. राजा के शासनकाल में मंडी रियासत सिख राजा रणजीत सिंह को सालाना कर दिया करती थी. कर की अदायगी कम होने पर राजा रणजीत सिंह ने बलबीर सेन को कैद कर लिया था. मान्यता है कि कैद में राजा बलबीर सेन ने अपनी कुल देवी की आराधना की और कैद से मुक्त करवाने के लिए अरदास की कुल देवी ने कन्या रूप में राजा को दर्शन दिए और राजा बलबीर सेन को आदेश किया कि कैद से छूटने पर टारना स्थित मंदिर की सजावट करवाई जाए.
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कैद से मुक्त होने के बाद राजा बलबीर सेन ने जयपुर और जोधपुर से कारीगर मंगवाकर मंदिर के गर्भगृह की सोने-चांदी से उकेरे बेल बूटों से सजावट करवाई. मंदिर के अंदर काली मां की तीन मुखी मूर्ति स्थापित है. माता का मुख दखिण दिशा की ओर है. सन्मुख राजा बलबीर सेन का सुंदर चित्र बना है. मूर्ति के बाईं तरफ महिषासुरमर्दिनी अष्टभुजी दुर्गा की सुंदर मूर्ति है तथा दाहिने पंचमुखी शिव विराजमान हैं.
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प्रांगण में माता की ओर मुंह किए शेर, शेरनी और शावक की सुंदर मूर्तियां हैं. इनके पीछे चौसठ योगिनियों के साथ अष्ट भुजी दुर्गा की सुंदर प्रस्तर प्रतिमा दर्शनीय है. मंदिर की पुजारिन ललिता ने बताया कि राजा द्वारा चढ़ाए गए सामान को बेहड़े में रखा गया है. पहले साल में एक बार अष्‍टमी के दिन इसे मंदिर लाया जाता था और श्रृंगार किया जाता था, लेकिन अब सिक्‍योरिटी व्‍यवस्‍था को ध्‍यान में रखते हुए ये सामान बेहड़े में ही रखा गया है.

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