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मकर संक्रांति पर मक्खन से भरे जाएंगे बज्रेश्वरी माता के जख्म, जालंधर दैत्य से लड़ते हुए हुईं थी जख्मी!

कांगड़ा: मकर संक्रांति पर शक्तिपीठ बज्रेश्वरी देवी मंदिर में शुरू होने वाले घृत मंडल पर्व की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. 14 जनवरी को शाम पांच बजे माता की पिंडी पर मक्खन चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी और मंदिर प्रांगण में भगवती जागरण का आयोजन किया जाएगा.

मक्खन से तैयार की गई मात की मूर्ति (वीडियो).


जिलाधीश संदीप कुमार दीप प्रज्वलित कर जागरण का शुभारंभ करेंगे. इस मौके पर कांगड़ा उपायुक्त संदीप कुमार बज्रेश्वरी देवी मंदिर की वेबसाइट, मंदिर परिसर में नवनिर्मित 30 केवी सोलर लाइट सिस्टम और गोसदन डोनेशन बॉक्स योजना का शुभारंभ भी करेंगे.

एसडीएम व मंदिर उपायुक्त शशीपाल नेगी ने बताया कि बताया कि घृत मंडल पर्व को यादगार बनाने के लिए इस बार अमृतसर के शर्मा म्यूजिकल बैंड ग्रुप और कमल एंड गंगानगर के पार्टी कलाकार जागरण के मंच पर प्रस्तुतियां देंगे. जागरण में झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी. कुल्लू से नीरू चांदनी व कांगड़ा से कुमार साहिल, राजेश बबलू और सौरभ शर्मा भी जागरण में अपनी प्रस्तुतियां देकर समा बांधेंगे.
14 जनवरी के दिन मंदिर के लंगर हॉल में खिचड़ी और रात को श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था की गई है. 20 जनवरी तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान रोजाना मंदिर परिसर में शाम को भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा.

मां की पिंडी पर चढ़ाने के लिए मंदिर प्रशासन को अभी तक लगभग 28 क्विंटल देसी घी श्रद्धालुओं से दान में मिल चुका है. इस साल प्राप्त घी पिछले साल की तुलना में दस क्विंटल अधिक है. मकर संक्रांति पर्व पर मेन बाजार की तहसील चौक से मंदिर के प्रवेश द्वार तक रंग-बिरंगी लाइटें लगाई जा रही हैं. साथ ही मंदिर परिसर और नगर के छोटे मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जा रहा है.

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जालंधर दैत्य से लड़ते हुए हुई थी जख्मी
देवी के शक्तिपीठों में से एक कांगड़ा स्थित बज्रेश्वरी माता मंदिर की जगह पर माता सती का वक्षस्थल गिरा था. माता के मंदिर में देश-विदेश से भक्त उमड़ते हैं. यहां पर मां पिंडी के रूप में विराजमान है. बताया जाता है कि जालंधर दैत्य को मारते समय माता के शरीर पर कई चोटें आई थी. इसके बाद देवताओं ने माता के शरीर पर घृत का लेप किया था. उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यहां सदियों से माता की पिंडी पर घृत का लेप करने की परंपरा जारी है. हर साल मकर संक्रांति पर मां को कई क्विंटल मक्खन का लेप किया जाता है और मां का घृत मंडल सजाया जाता है.

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