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घोटालों से बचने के लिए शिक्षा विभाग बना रहा मास्टर प्लान, शिक्षण संस्थानों को दिए ये निर्देश

शिमला: प्रदेश शिक्षा विभाग में हुए करोड़ों के घोटाले के बाद अब विभाग अलग-अलग तरह के प्लान इस तरह के घोटाले से बचने के लिए बना रहा है. विभाग ने शिक्षण संस्थानों को अपने यहां छात्रवृत्ति मोनिटरिंग सेल का गठन करने के निर्देश दिए हैं.

हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग.


छात्रवृत्ति से जुड़ी किसी भी तरह की आपत्ति को विभाग के सामने दर्ज करवाने के निर्देश भी शिक्षा विभाग ने छात्रों और उनके अभिभावकों को दिए हैं.
बता दें कि प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय ने छात्रवृति संबधि आपत्तियों को लेकर छात्र छात्राओं और उनके अभिभावकों को ऐसे मामले ज्यादा से ज्यादा प्रकाश में लाने को कहा है. विभाग के निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने ये निर्देश जारी किए हैं और कहा है कि अगर किसी भी छात्र की छात्रवृत्ति को लेकर कोई भी परेशानी है तो उसे विभाग के समक्ष लाया जाए.

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विभाग में कुछ समय से छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्तियों से संबंधित आपत्तियां दर्ज एवं उजागर की जा रही है. इसमें से अधिक्तर आपत्तियां हिमाचल प्रदेश से बाहर शिक्षा संस्थानों में उच्चर शिक्षा ग्रहण कर रहे प्रदेश के एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्तियों से संबंधित है.

पहले भी जो करोड़ों का घोटाला हुआ है उसमें बाहरी संस्थानों की संलिप्तता पाई गई है. अब भी जो आपत्तियां छात्र दर्ज करवा रहे हैं, वो भी प्रदेश के बाहरी संस्थानो से ही जुड़ी हुई हैं. ये शिक्षा संस्थान छात्र छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा या छात्रावास के प्रलोभन के आड़ में छात्रों की छात्रवृत्ति हड़प रहे हैं. ऐसे में अब विभाग की ओर से भी छात्रों को यह चेताया गया है कि प्रदेश और प्रदेश से बाहर कोई भी शिक्षण संस्थान ऐसे नहीं है जो छात्रों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं.

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डॉ. अमरजीत शर्मा ने बताया कि छात्रवृत्ति,पात्र छात्रों के बैंक खातों मे ही दी जाती है. प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के स्थाई छात्र छात्राओं को छात्रवृति प्रदान की जाती है न कि उन शिक्षण संस्थानों को जो इस तरह का घोटाला कर रहे हैं.

विभाग की ओर से छात्रवृति प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता से की जाती है. सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं, जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि इस तरह के मामले को ज्यादा से ज्यादा प्रकाश में लाए ताकि प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की ओर से प्रायोजित छात्रवृति योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा से लाभ पात्र छात्रों को मिलें और ऐसे संस्थानों पर विभाग कड़ी कार्रवाई कर सके.

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