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बंद कमरों से बाहर निकली कांग्रेस, मोदी के गढ़ में पहुंचकर बीजेपी को घेरा

वाराणसी : लोकसभा का चुनाव नजदीक है और उत्तर प्रदेश में जिस तरह से सपा-बसपा का गठबंधन हुआ है.  उसके बाद यह चर्चा आम हो गई है कि बीजेपी की मुश्किलें बढ़ने वाली है. वहीं इन सबके बीच कमरों में बैठकर रणनीति तैयार करने वाली कांग्रेस भी अब खुलकर सामने आ रही है.

देखें रिपोर्ट.


सपा- बसपा गठबंधन के बाद कांग्रेस को साइडलाइन किया जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ है. इसके बाद भी कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है और शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से की गई है.
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कांग्रेस में लोग खुलकर बात करतें है. कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पहुंचकर बीजेपी को घेरने का प्रयास किया है. कांग्रेस के 2019 लोकसभा चुनाव की घोषणा पत्र को तैयार करने के लिए बनारस पहुंचे. यहां चिदंबरम ने बातों-बातों में बोले कि बीजेपी के कार्यक्रमों में लोग डरते हैं , लेकिन कांग्रेस में लोग खुलकर बात करते हैं. वहीं लोगों की प्रतिक्रिया लेकर अपने घोषणापत्र को तैयार करने के दावे कर पीएम के ही संसदीय क्षेत्र में उनको कमजोर दिखाने का प्रयास किया. इसके बाद यह साफ हो गया है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी पूरी ताकत लगाने की तैयारी किए बैठी है.

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यूपी में कांग्रेस की राह बड़ी कठिन उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन जिस तरह से हुआ उसके बाद यूपी की सभी लोकसभा सीटों के साथ पूर्वांचल की 34 लोकसभा सीटों पर अब जातिगत समीकरण पर पूरी तरह से लड़ाई देखने को मिलेगी, क्योंकि पहले से ही मायावती अपने दलित वोट बैंक को मजबूत करते हुए सवर्णों पर भी निगाह बनाए हुई थी. वहीं अखिलेश यादव का साथ मिलने के बाद अब यादव और मुस्लिम वोट भी अगर इनके पाले में रहे तो कहीं ना कहीं से बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. वहीं इन सब के बीच सबसे ज्यादा परेशानी कांग्रेस को उठानी पड़ सकती है. इसकी वजह है कि इस महागठबंधन में कांग्रेस को शामिल ही नहीं किया गया है.
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कांग्रेस लड़ेगी अपने दम पर चुनावहालांकि कांग्रेस इन सबसे परे अकेले दम पर चुनाव लड़ने का दम भर रही है और कद्दावर नेता खुद मैदान में उतारकर कांग्रेस को मजबूती प्रदान करने की कोशिश में जुटे हैं. जिसकी बानगी वाराणसी में उस वक्त देखने को मिली जब पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर बनारस पहुंचे. यहां उन्होंने पूर्वांचल के लगभग 10 से ज्यादा जिलों से आए हजारों लोगों जिनमें डॉक्टर, इंजीनियर, बिल्डर, बिजनेसमैन और इंडस्ट्रीज शामिल थे. उनसे कांग्रेस का घोषणापत्र तैयार कराए जाने को लेकर प्रतिक्रिया ली.

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खुलकर मैदान में आ रही है कांग्रेस
किसी ने जीएसटी की बात रखी तो किसी ने नोटबंदी से हुए नुकसान की भरपाई कांग्रेस की आने वाली सरकार से करने की उम्मीद जताई. स्टूडेंट और गृहणियों ने भी अपनी बातें खुलकर रखी. जिसके बाद कहीं ना कहीं से यह तो साफ होता दिख रहा है कि कांग्रेस अब बंद कमरे से निकल कर पब्लिक के बीच पहुंच बनाने में जुट गई है, ताकि 2019 की राह आसान हो जाए. वहीं कांग्रेस के नेता भी अब बीजेपी को घेरते हुए उनके घोषणा पत्र के अनुसार किए गए वादों के पूरा ना होने पर जुमलों की सरकार कह के बीजेपी को घेरने में जुटी है.



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